by Major Krapal Verma | Jun 4, 2023 | स्नेह यात्रा
अचानक एक स्पोर्ट्स कार में जो लाल गहरे रंग की है, लड़के लड़कियों का एक हुजूम हमारे पास से सांय करके गुजरा है। उन सब ने चीख कर कहा है – हाय! देयर? सभी के हाथ हवा में पल भर उठ कर झूल गए हैं। सभी ने बहुरंगी पोशाकें पहनी हैं और लड़के तथा लड़कियों के भेद जान लेना...
by Major Krapal Verma | Jun 3, 2023 | जीने की राह!
श्री राम शास्त्री भी लौट आए थे। एक बेजोड़ सफलता कांख में दबाए वो अमरपुर आश्रम के आभारी थे। नई जीने की राह जो उन्होंने गही थी – उसने उन्हें स्वर्ग दिखा दिया था। “सच कहता हूँ अमरीश जी आश्रम में आने के बाद ही मेरी आंखें खुलीं। नौकरी ने तो मुझे निकृष्ट और...
by Major Krapal Verma | Jun 2, 2023 | स्नेह यात्रा
“रात कैसी कटी?” मैंने हंसते हुए सोफी से पूछ लिया है। प्रश्न के साथ-साथ हमारी चंचल आंखें ठहर कर एक दूसरे से यही प्रश्न पूछ रही हैं। सोफी ने मुझे बहुत प्यारी नजर से घूरा है और कहा है – सुपर्ब! एक गौरव मुझमें व्याप्त होता लगा है। पुरुष होने का गौरव...
by Major Krapal Verma | May 31, 2023 | जीने की राह!
एक शुभ जैसी संभावना बन वंशी बाबू का अमरीश विला में आगमन हुआ था। अमरीश जी, सरोज सेठानी, अविकार और अंजली हर्षोल्लास से भर उठे थे। आश्रम छोड़ कर आने में जो अपार कष्ट हुआ था – उसे उन्होंने मौन धारण करके सहा था। कोई एक शब्द भी नहीं बोला था। जबकि अमरपुर आश्रम आज भी...
by Major Krapal Verma | May 30, 2023 | स्नेह यात्रा
आगे लगे रेडियो से अनवरत संगीत मुखरित होता खाने की कमी पूरी करता लगा है। किसी अजान लय पर मैं थिरकता जाता हूँ, सोफी को मरोड़ देता हूँ और अजीब से हाव भावों से अपनी प्रसन्नता जाहिर करता रहा हूँ। बाहर का सुनसान वातावरण हमें अंदर भरे है जैसे शरीर में कोई हृदय – टिप...