by Major Krapal Verma | Jul 19, 2023 | स्नेह यात्रा
“सर अब बात अपनी मुठ्ठी में है!” खुश होते हुए मुक्ति ने कहा है। “कैसे?” मैंने गंभीरता पूर्वक मुक्ति का मत जानना चाहा है। “हमारा पलड़ा भारी है। जीत को अब हमने खरीद लिया समझो और अगर जीत मुंह नहीं खोलेगा तो बाकी किसी में दम नहीं है।”...
by Major Krapal Verma | Jul 18, 2023 | स्नेह यात्रा
“कायर! अकर्मण्य! छलिया! क्या पा लिया तुमने जग का छोर? आ गया अंत तुम्हारी पहाड़ जैसी महत्वाकांक्षा का? हार गए हो न तुम? सोफी का साया है जो मुझे जलील कर रहा है। रुके कदम, टूटी आशा, घोर निराशा का अथाह समुद्र, अकेलापन और मिटने का भय – सभी को सोफी चीरती लगी है।...
by Major Krapal Verma | Jul 17, 2023 | स्नेह यात्रा
“डाउन विद डांगरी!” “डाउन विद डिकटेटरशिप!” “सरमायादारी – हाय-हाय!” पाेस्टर और नारों के साथ सुबह ही जुलूस का समागम हुआ है। स्टाफ के कुल कर्मचारियों की आधी संख्या है। उसमें भी दो-चार को छोड़ सब अधेड़ उम्र के छोकरे हैं। मैं और...
by Major Krapal Verma | Jul 14, 2023 | स्नेह यात्रा
“बाई द वे एक अहसान पूछ लूं – इजाजत हो तो?” नवीन ने एक चुभते बेगाने भाव को दो दोस्तों के बीच कटे बकरे की तरह उलटा लटका दिया है। मैं इस उलटे टंगे बकरे की कुर्बानी से एक कुंठा के साथ बंध गया हूँ। उसकी धमनियों से टिप-टिप बहता खून एक दोस्ती की आहूति पर...
by Major Krapal Verma | Jul 4, 2023 | स्नेह यात्रा
“आई एम सॉरी जेंटलमैन! आई हैव टू लीव!” कह कर मैं बिना किसी पाई अनुमति की परवाह किए सीढ़ियां अतर रहा हूँ। आते ही कार स्टार्ट की है। सीधा फैक्टरी पहुंचने का इरादा है। “चल कर क्या करोगे?” मैंने अपने आप से सवाल पूछा है। “कुछ तो करूंगा...