स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

वातावरण में एक अजीव आह्लाद भर गया है। औरतें भिन्न-भिन्न स्वरों में कोई सामूल सा गीत गाती जा रही हैं जिसका अर्थ लगाना मेरी बिसात के बाहर लगा है। ढोलक की गुमक अवश्य मन में एक गुम्माटा सा उठा रही है। पता नहीं क्यों ये गुमक हमेशा से मुझे अपने हृदय की धड़कन के बहुत समीप...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड पांच

“प्रलय तो नहीं आ रही?” मैंने इस तरह पूछा है जैसे मैं इंतजार में आंखें बिछाए बैठा हूँ। “आ भी जाए तो ताज्जुब नहीं सर! आई मीन ..” “आत्मीयता का अंधकार बढ़ रहा है, संस्कार गिर रहे हैं और ..” “दुख होता है सर! ये बेचारे पंछी किस तरह...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड चार

वेश बदल कर जाना। लुक छिप कर जाना। एक पल पांच हजार का चेक थमा गायब हो जाना। पर एक पल जरूर जाना वरना तू हार जाएगा। मेरे अंदर का वर्षों का पला दंभ मुझे एक जटिल भूमिका निभाने को कहता रहा है। चोरी गुपचुप नजरें बचा कर किया काम है। कोई समाज या गुट का विरोध या अन्य कोई इकला...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड तीन

“बच्चों का क्या हाल है?” “दुआ है सरकार और .. अर ..” “बोलो-बोलो क्या बात है?” “सुलोचना की शादी पक्की हो गई है।” “सुलोचना ..?” “मेरी बड़ी बेटी सरकार! उस दिन ..!” “अरे हां-हां! उस दिन मैंने ही...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड छह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड दो

“सर!” “यस!” “आज का पेपर पढ़ा है?” “नहीं तो, क्यों?” “प्रेस ने इंस्पेक्टर राना की रिपोर्ट नमक मिर्च लगा कर छापी है!” “तो ..?” “सर, आप ने जो स्टेटमेंट दिया है – आई मीन गलती हो गई...