स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

“दो मिनट मिलेंगे?” मैंने नवीन से मांग की है। “ओके!” कह कर बे मन नवीन मेरे साथ लॉन में बाहर निकल आया है। “नवीन! मैं फंस गया हूँ!” मैंने सीधी बात सामने रक्खी है। “लिमिट पार करोगे तो ..” “नवीन! तू भी यही सोचता है कि...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड दस

“अरे भइया! वही तो काम हो रहा है। खिलाफत वालों को लिस्ट बना कर बीन रहा है। कसम से भइया .. कसम से अपुन तो मर गए!” “ऐ! मेरा काम ..?” मैंने दोनों की सामर्थ्य को ललकारा है। “तेरा काम .. माने तेरा केस! भइया! तुझे तो और फांसेगा। देख लेना –...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड नौ

मैं बहुत हताश और अधीर हुआ जा रहा हूँ। सबसे ज्यादा अफसोस मुझे मानव के विकृत संबंधों और उसकी टुच्ची महत्वाकांक्षाओं के बनावों पर हो रही है। लगता है अब समाज या तो असलियत खो रहा है और या वर्षों से धर्म धारणा से बंधा आडंबर का छप्पर खिसका कर उसका असली रूप उघाड़ रहा है। हर...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड आठ

“तो काम कैसे चलता है?” “काम चलता है जूते से। सच मानिए जूते से पैसा डरता है। अब आप को ही ले लें – शराफत, ईमानदारी या यों लोगों के हित की सोचने से आप को क्या मिलता है?” “संतोष, मिस्टर राना!” “और अगर आपका खुद का नौकर आप के...
स्नेह यात्रा भाग नौ खंड ग्यारह

स्नेह यात्रा भाग नौ खंड सात

सुबह अथक सूरज को देख मैंने भी अपनी थकी टूटी सी हिम्मत बटोरी है और अपनी दिनचर्या पूरी करने को तैयार हुआ हूँ। पता नहीं कुछ अधकचरा सा एक बैर भाव मन में सिमिटता चला आ रहा है। कोई मेरे अंदर से ही कहे जा रहा है – हथियार उठाओ दलीप बुराई को बुराई कुचलती है। लेकिन सवाल...