तीर्थराज

जमुना गंगा गोमती तीरथ बड़ा प्रयाग, चारि प्रयागन से बड़ा तीरथ राज प्रयाग || ~कुमार गौरव

ये शहर तमन्नाओं का बाजार है सज रही यहां उम्मीद की बहार है भरने दो उड़ान अपने सपनों को कि ज़िंदगी के दिन भी तो बस दो-चार...

तू मेरा सकूं

मंत्रोच्चारण से,अजान से, लोगों के सभ्य समाज से, नहीं मिलता है सकूं,जो सुन कर मिलता है तेरी आवाज़ से। यार से, संसार से, लोगों के जय जयकार से, नहीं मिलता है सकूं,जो मिलता है तेरे दीदार से। दोलत से,शोहरत से, लोगों के शोहबत से, नहीं मिलता है सकूं,जो मिलता है तेरी मोहब्बत...
खानदान 44

खानदान 44

कुछ भी हुआ हो.. और रमेश कैसा भी हो!.. एक बार फ़िर सुनीता को लेने दिल्ली आ रहा था। रमेश को स्टेशन मुकेशजी और सुनील दोनों ही लेने जाने वाले थे। स्टेशन पर रमेश सुनीलजी को मुकेशजी के साथ देखकर एकदम सकपका सा गया था। सकपकाया हुआ रमेश एकदम ही बोल उठा था,” अरे! हा! हा! आप भी...
कानू और जैरी

कानू और जैरी

मुझे गले से लगा लो बहुत उदास हूँ, मैं। आजकल यह पंक्तियाँ हम अपनी प्यारी कानू के लिये ही गुनगुनाते रहते हैं.. जब भी हम अपनी भोली और गुड़िया कानू की तरफ़ देखते हैं.. तो हमें ऐसा लगता है.. मानो हमारी रानी बेटी कानू हमसे यही कह रही हो” माँ! आप मुझे अपने गले से लगा लो!.....

शहीद दिवस

आओ मिलकर दिया जलायें, आओ श्रद्धा सुमन चढायें, दो पल उन को भी दें दान देशधर्म की बलिवेदी पर, जिनने अर्पण कर दी जान ||1 जिसने कभी न सोंचा कुछ भी, देश रक्षा निज कंधों पर ही, सीने पर रख कर ज्वालायें जो सो गए पुण्य राहों में उनको हम एक दीप जलायें आओ मिलकर दिया जलायें आओ...