खानदान 127

खानदान 127

” आप मेरी बात मान जाओ! वो लड़की ग़ुस्से में और थाने से ही बोल रही थी.. वो और कहीं भी नहीं थी.. अगर आप अभी पुलिस-स्टेशन नहीं पहुँचे तो वो यहाँ घर आ जाएगी, और वो तमाशा खड़ा होगा.. जो दुनिया देखेगी!”। रमेश एकबार सुनीता की बात पर कुछ कहने ही वाला था.. पर...
मन

मन

मन जो जीत लेअसंभव नहीं हैकुछ उसके लिए!पर जीतना मन कोइतना आसान भी नहींपता है कि समय काम का हैमन कहता हैनहीं, मेरी उडान का हैबाँध ले जो मन कोसूरमा वोबँध गया मन से जोबह गया...
खानदान 127

खानदान 126

” ये क्या कह रही हैं! आपके हस्बैंड के बारे में.. आप उन्हें थाने भेज दिजीये!”। पुलिस वाले ने सुनीता से बात करते वक्त कहा था। ” लो फ़ोन कर लो बात!”। सुनीता ने रमेश को फ़ोन पकड़ाते हुए, कहा था। ” नहीं मुझे नहीं करनी किसी से भी बात! तू ही कर...
याद

याद

याद तुम्हारी इतनी आई हर रिश्ते मैं तुम्हें ढूँढते मैं पगलाई नहीं मिलीं तुम मुझे और किसी भी रिश्ते में माँ हार थककर तुम्हें खोकर मैं घबराई कोई और रस्ता अपने आने का सोच समझ कर निकाल दो माँ तुम कहीं ये शेष जीवन तुम्हें ढूँढते निकल न...
याद

कलम

देखो! लिख रहीं हूँ मैं याद आ रही है तुम्हारी आज बहुत माँ!! तुम होतीं तो आज मेरी लेखनी पढ़ तारीफों के पुल बाँधती बेशक कैसा भी हुनर उभरा है मेरा माँ! तुम शब्दों की चाशनी से उसे रोज़ साँवरतीं तुम्हारा चेहरा देख मैने कलम पकड़ी है माँ! जानती हूँ मेरी कलम में समा कर प्रेरणा...
खानदान 127

खानदान 125

रनेश घर आने के साथ ही पसीना-पसीना हो गया था। टेंशन में आकर सुनीता के आगे बोल उठा था.. ” अरे! किसी काले से आदमी के साथ मोटरसाइकिल पर भाग गई! मैं देखता ही रह गया.. पता करना पड़ेगा कौन था, साला..!!”। रमेश रंजना को लेकर बोला था। और यह भी बोला.. ” भाग कर...