याद तुम्हारी
इतनी आई
हर रिश्ते मैं
तुम्हें ढूँढते
मैं पगलाई
नहीं मिलीं
तुम मुझे
और किसी
भी रिश्ते
में माँ
हार थककर
तुम्हें खोकर
मैं घबराई
कोई और
रस्ता अपने
आने का
सोच समझ
कर निकाल
दो माँ
तुम
कहीं ये
शेष जीवन
तुम्हें ढूँढते
निकल न
जाए।
याद तुम्हारी
इतनी आई
हर रिश्ते मैं
तुम्हें ढूँढते
मैं पगलाई
नहीं मिलीं
तुम मुझे
और किसी
भी रिश्ते
में माँ
हार थककर
तुम्हें खोकर
मैं घबराई
कोई और
रस्ता अपने
आने का
सोच समझ
कर निकाल
दो माँ
तुम
कहीं ये
शेष जीवन
तुम्हें ढूँढते
निकल न
जाए।