कुछ पल होंगे ऐसे भी

कुछ पल होंगे ऐसे भी

कुछ पल होंगे ऐसे भी जबजलता होगा सूरजबहती होगी गरम हवा दूर-दूर तक छांव न होगी फिर भी चलना होगा!फिर पुरवाई आएगीकुछ बादल बरखा लाएँगेतपती हुई धरा कोतृप्ति का एहसास कराएँगेहरियाली तब होगी चारों ओर!बादल जब बरसेंगे ज्यादा होगा जल ही चारों ओरहाथ जोड़ तब प्रकृति सारी करती होगी...
खानदान 129

खानदान 129

” नहीं अब इसको तो अब मैं ऐसे ही थोड़े ही छोडूंगा.. इसके मेरे पास पाँच हज़ार से भी ज़्यादा फ़ोटो हैं! जाएगी कहाँ..!!”। रमेश ने सुनीता को रंजना के विषय में बताया था। रंजना द्वारा इतने तमाशे करने पर भी रमेश रंजना का पीछा बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहता था.. यहाँ...
नानी

नानी

नानी करतीं नानी कहतीं नानी ऐसी होती थीं नानी-नानी करते-करते बच्चे तुम्हें याद करते हैं.. माँ सपनों मे आतीं बच्चों के दिल ख़ुश करतीं नानी बन के इतना प्यारा रिश्ता जोड़ा फ़िर कहाँ गईं तुम नानी बन के लौट के आकर माँ तुम देखो! अपने प्यारे फूल कमल के आओ सींचो प्यार से फिर...
खानदान 129

खानदान 128

दस से पंद्रह मिनट के अंदर लड़की घर पर पुलिस लेकर आने वाली थी.. लेकिन यहाँ तो दस से पंद्रह मिनट कई घन्टों में बदल गए थे.. न कोई लड़की और न ही कोई पुलिस थी। बच्चे भी हार-थककर और इंतेज़ार कर अपने-अपने कमरों में चले गए थे। रमेश भी पुलिस के डर से भागा देर रात को घर पहुँच...
जिन्दगी खेल ही तो है!

जिन्दगी खेल ही तो है!

जिंदगी खेल ही तो है!खेलो, जी जान सेसोचो तो मुश्किलें हैं बहुतना सोचो तो आसान हैजो करना हैध्यान उसका करोक्यों? अगर है पता तो कैसे? आसान हैअच्छा क्या हैऔर क्या है बुराबस एक नज़रिया ही तो हैबदल लो नज़रिया तो जिन्दगी बदल जाती हैहवा, आग, पानीमिटटी और आकाशबस बदलता रहता है...
शाम की तन्हाई

शाम की तन्हाई

मुझे हर शाम की तन्हाई में तुम्हारा चेहरा दिखने लगा है माँ! मेरा बचपन तुम्हें सोचकर हर शाम की तन्हाई में लौटने लगा है माँ ऐसा प्रतीत होता है मानो शाम को थककर तुम्हारे पहलू में फ़िर एकबार लौट रही हूँ मैं तुम्हारे गुलाब से कोमल स्पर्श से एक बार फ़िर नया होंसला मिलता है...