by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
फूलों के सुन्दर बागीचे में हर भोर तुम्हें ढूंढ़ता है मन वो तुम्हारे हाथ हिलाते हुए मुस्कुराकर टहलने को देखने के लिये तरसता है मन तुम्हारे बगैर यह सुन्दर बागीचा सुनसान लग रहा है माँ! अपने भोर के टहलने से एकबार फ़िर इस फूलों भरे बागीचे को गुलज़ार कर दो माँ..!! स्वर्गलोक...
by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
आकर कहाँ चली जाती हो तुम क्यों दिखकर छुप जाती हो तुम हो ही नहीं अब तुम सच तो यह है! केवल मन का वहम बन दिख जाती हो तुम अब तुम बिन जीना सीख लिया है.. मैंने! पर फ़िर भी मेरा वहम बन दिख जाती हो तुम...
by Rachna Siwach | May 28, 2019 | Uncategorized
शादी-ब्याह का भी अपना एक अलग ही मज़ा है! और सर्दियों में हो रही शादी की तो बात ही कुछ और होती है.. असली खाने-पीने और जायके का मज़ा तो सर्दियों में ही आता है। शरद ऋतु में शुरू होकर शादियां अब तक यानी के जून के महीने तक तो चलती ही हैं। शादी-ब्याह में आना-जाना हो ही जाता...
by Verma Ashish | May 28, 2019 | Uncategorized
ना जाने क्या मजबूरी हैलोग राष्ट्र को नहींपार्टी को देते हैं महत्व ज्यादाबात लोकतंत्र की होती हैपर नेता नहीं बदले जातेपार्टी मे जिनकी परिवार तंत्रवो लोकतंत्र समझाते हैंइस्तीफ़े आते हैं प्यादों के जो हैं हार के जिम्मेदारवो साफ साफ हैंबच जाते!ना जाने क्या मजबूरी हैक्यों...
by Rachna Siwach | May 28, 2019 | Uncategorized
माँ-बापू का मीठापन सदा रहेगा मेरे साथ तुम्हारा और बापू का साथ में रहना सदा रहेगा मेरे साथ पर अचानक तुम्हारा जीवन संगी का यूँ हाथ छोड़ना वो भी रहेगा मेरे साथ पर अब बापू संग साये की तरह से रहतीं हो तुम यह भी सदा रहेगा मेरे साथ अपने होने का अहसास सदा बापू संग रखना...
by Rachna Siwach | May 28, 2019 | Uncategorized
ऐसा लग रहा था लंबी सुनसान सड़क पर तुम तेज़ी से चलती चलीं जा रहीं थीं मैं तुम्हारे पीछे ही तो थी पर तुमसे बहुत दूर होकर भी पहचान लिया था मैंने तुमको माँ हाँ! वो तुम ही तो थीं जो मुझे अब धुंदली सी दिखाई देने लगीं थीं मैं भी बहुत तेज़ चल रही थी पर पहुँच न पाई थी तुम तक।...