आकर कहाँ
चली जाती
हो तुम
क्यों दिखकर
छुप जाती
हो तुम
हो ही
नहीं अब
तुम
सच तो
यह है!
केवल मन
का वहम
बन
दिख जाती
हो तुम
अब तुम
बिन जीना
सीख लिया
है.. मैंने!
पर फ़िर
भी मेरा
वहम बन
दिख जाती
हो तुम
माँ!
आकर कहाँ
चली जाती
हो तुम
क्यों दिखकर
छुप जाती
हो तुम
हो ही
नहीं अब
तुम
सच तो
यह है!
केवल मन
का वहम
बन
दिख जाती
हो तुम
अब तुम
बिन जीना
सीख लिया
है.. मैंने!
पर फ़िर
भी मेरा
वहम बन
दिख जाती
हो तुम
माँ!