by Rachna Siwach | May 31, 2019 | Uncategorized
अस्वस्थ हूँ मैं याद तुम्हें आज करती हूँ! कहाँ से लाऊं नीम हकीम तुम जैसा कोई मिलता नहीं तुम्हारे स्पर्श और बोलों से ठीक हो जाया करती तुम जैसा हाकिम कोई अब मिलता नहीं इस चलती हवा के संग घूम फ़िर और छुपकर तुम आज मेरे लिए हकीम बन आ जाओ माँ! चुपके से कोई नई दवा दे मेरा...
by Rachna Siwach | May 31, 2019 | Uncategorized
” देखा! मैने कहा था.. न! कि अगर ये दुबई चली गयी, और इसे वहाँ की हवा लग गई.. तो ये इसे हमेशा के लिये छोड़ देगी!”। सुनीता ख़ुश थी.. कि लड़की भाग गई.. और यह ख़ुशी सुनीता अपनी हर जगह बाँटती फ़िर रही थी। और तो और मुकेशजी और अनिताजी को भी पता चल चुका था.. कि...
by Rachna Siwach | May 30, 2019 | Uncategorized
” तन्ने बेरा सै! दिल्ली में बहुत बड़ा काली का मंदिर सै! अरे! अपनी वा सै! ने! वा काली ने माने सै!” रमेश दर्शनाजी के सामने रंजना को लेकर शेख़ी बघार रहा था.. दिल्ली में काली के मंदिर के विषय में बताते हुए.. रंजना के बारे में भी बोले जा रहा था.. कि वो काली को...
by Rachna Siwach | May 30, 2019 | Uncategorized
कुछ याद है.. माँ! तुम्हें जब हमारा बचपन था.. और हमारा केवल पाँच सदस्यों का एक छोटा सा घोंसला हुआ करता था.. उस वक्त कितनी अनोखी और प्यारी कहानी हुआ करती थी.. हमारी। पिताजी फौज में अफसर थे.. मज़े के दिन और बिंदास ज़िन्दगी चल रही थी.. धीरे-धीरे तुम्हारे हाथ का लज़ीज़...
by Sanskriti Verma | May 30, 2019 | Uncategorized
Surrounded by the white walls, His heart looks beyond, Giving him strength, Giving him sunshine, Giving him everything that he needs to survive, Everything, but his child. He longs for the warmth of his child, The sweet wrinkles shine, When he remembers his smile, He...
by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
अब सुनीता को लेकर रमेश का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था। और वो ख़ुद ही रंजना को लेकर गहरे राज़ खोल रहा था। सुनीता के सामने कुछ इस तरह से खोले थे.. रमेश ने सारे राज़.. ” अरे! इसकी मौसी कोई मंत्री-वन्त्री नहीं है! झूठ बोलती है! ये! छोटे से फ्लैट में पड़ी है.. बोलती...