by Rachna Siwach | May 23, 2019 | Uncategorized
” अब तो सब-कुछ बेच-वेच कर दुबई जाने का इरादा है। लडक़ी पीछे पड़ रही है.. मेरे साथ दुबई चलो!”। यह ख़बर अब पूरे घर में आग की तरह फैल गई थी। सुनीता ने दुबई जाने का जैसे गाना ही बना डाला था। अब तो हर घर के हर आदमी ने रमेश और दुबई का जैसे जुमला ही बना डाला था।...
by Rachna Siwach | May 22, 2019 | Uncategorized
माँ..!! कहाँ हो तुम मेरी आवाज़ सुन आजाओ न! कितनी तेज़ी से आवाज़ हुई कि तुम्हारी रेल निकल गई कौन सी रेल में बैठ निकल गईं तुम मैं देखती ही रह गई इतनी तेज़ी से क्यों चढ़ गईं थीं माँ तुम छोड़ कर सबको दौड़ी चली आई थी मैं पर तुम्हारी रेल निकल गई अब हर रेल के आते-जाते...
by Rachna Siwach | May 21, 2019 | Uncategorized
बहुत ख़ुश कर गईं हो माँ अब तुम मुझको ढ़ेर लिबास दे विदा मेरी भर गईं हो तुम तो रोज़ नया तुम्हारा आशीर्वाद पहन अब घूमूँ फिरूँ मैं मन ख़ुश हो गया ऐसी विदा भर गई हो तुम तो पर तुम यह सब पहनतीं तो मन ज़्यादा हँसता तुम्हें रोज़ सजा-धजा देख सच! मन खिल उठता आजाओ माँ! भूल से...
by Rachna Siwach | May 21, 2019 | Uncategorized
एक बहन का तो घर बस गया था, दूसरी बहन इंतेज़ार में बैठ-बैठ कर थक गई थी। बेचारी रंजना ने सीधे-सीधे भी रमेश से हिस्से का पूछ लिया था… पर कोई जवाब ही नहीं मिल पा रहा था। शादी-शुदा बहन के ठाठ-बाट देख.. रंजना की परेशानी बढ़ती जा रही थी। ” आपको पता है! ये रिश्ता मेरे...
by Rachna Siwach | May 21, 2019 | Uncategorized
रंजना और रमेश का रिश्ता अब खटास लिए आगे बढ़ रहा था। रंजना की बड़ी बहन का रिश्ता तय हो चुका था.. लड़का देखने सुनने में अच्छा और पढ़ा-लिखा था। दुबई में अच्छी नौकरी थी.. लड़के की! अच्छा-ख़ासा पैसा कमा लेता था। रंजना ने यह ख़बर रमेश को देने में बिल्कुल भी देर नहीं...
by Rachna Siwach | May 19, 2019 | Uncategorized
” ये और वो तो बराबर के हैं.. फैसला ये करेगी!”। रमा ने सुनीता के सवाल का जवाब दिया था.. कि रमेश और विनीत तो बराबर के हैं.. इस तरह की अगर कोई बात होती है! तो उसकी जवाबदार दर्शनाजी होंगी! अब सुनीता के दिमाग़ में इसी बात को लेकर तरह-तरह के ख़याल आने लगे थे.....