by Rachna Siwach | May 19, 2019 | Uncategorized
चेहरे पर चिन्ता थी आँखे पीछे को धँस गईं थीं तुम्हें देख तुम्हारे अन्दर कोई चिंता महसूस कर रही थी मैं परमात्मा का कोई इशारा समझ रही थी मैं तुम्हें देखकर कुछ भाँप लिया था मैंने माँ! ऐसा लगता था तुमसे कुछ कहने से डर रही थी मैं जो मैने भाँपा वही तुमनें भी भाँप लिया था...
by Rachna Siwach | May 19, 2019 | Uncategorized
जीवन में कभी-भी हमनें यह न सोचा था.. कि कभी हम कोई कुत्ता पालेंगे। बस! कुछ ऐसा इक्तिफाक हुआ.. कि प्यारी काना हमारी गोद में आ बैठी और न चाहते हुए भी हमनें इस प्यारी सी गुड़िया को अपना लिया और अपनी पूरी ममता और प्यार देकर बड़ा किया। आज कानू हमारे घर का कुत्ता न होकर एक...
by Rachna Siwach | May 17, 2019 | Uncategorized
गुलाबों के फूलों में बैठीं रानी लग रहीं थीं रानी नहीं तुम कोई महारानी लग रहीं थीं कुछ बोल उठोगी ऐसा लग रहा था सभी अपने तुमसे मिलने को मौजूद थे सभी संग आज तुम भी ख़ुश हो रहीं थीं सच! गुलाबों में बैठी महारानी लग रहीं थीं तस्वीर से ही भोजन का जायका चख लिया था तुमनें आज...
by Rachna Siwach | May 17, 2019 | Uncategorized
” अरे! अन्दर क्यों नहीं करा दिया था.. ये तो वो का वही है!” पिता के हंगामे पर प्रहलाद चिल्ला कर बोला था। सारी रात रमेश ने अपने कमरे में हिस्से और पैसे लेकर हंगामा जारी रखा था। इतना ज़बरदस्त हंगामा देख.. दोनों बच्चे परेशान हो कर घबरा गए थे.. और प्रहलाद ने...
by Rachna Siwach | May 17, 2019 | Uncategorized
जैसे ही रमेश के मुहँ से यह बात निकली थी.. कि रामलालजी को विनीत ने मार डाला.. दर्शनाजी एकदम चुप-चाप बैठीं रहीं थीं। बात रंजना से हटकर अब बटवारे पर आ गई थी.. रमेश पुलिस वालों के सामने अपनी पर आने ही वाला था.. कि एकबार फ़िर विनीत ने बात का रुख घुमा दिया था। बात...
by Rachna Siwach | May 16, 2019 | Uncategorized
” हम्म! यो..!! यो हमारे पेै पाई भी कोनी ले सकदा..!!” दर्शनाजी बड़बड़ाती घूम रहीं थीं.. सुनीता वहीं थी। ” कर लेन दे! माँ-बेटियाँ ने कोशिश कुछ भी कोनी दें हम!”। दर्शनाजी की बातों से साफ़-साफ़ ज़ाहिर हो रहा था.. कि रमेश को हिस्सा मिलना मुश्किल है।...