राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग चौबीस

“दो दिन से दिखे नहीं पंडित जी?” कालू पंडित कमल किशोर से सामना होते ही पूछ बैठा था। “राम चरन कह रहा था कि ..” उसने पंडित कमल किशोर के गुलाब से खिले चेहरे को पढ़ा था। “हां भाई!” पंडित कमल किशोर ने स्वीकारा था। “दो दिन से सुमेद...
राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग तेईस

“क्या बात है?” श्यामल ने परेशान हो कर पूछा था। आज कालू लौटने के बाद चुप था। वह किसी गहरी सोच में डूबा था। श्यामल का धीरज जवाब दे गया था। “भाग गया राम चरन?” उसने अंत में हिम्मत बटोर कर पूछ ही लिया था। कालू ने आंखें उठा कर श्यामल को देखा भर था।...
राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग बाईस

घर का खाना रेहड़ी को बड़े मनोयोग से आगे धकेलते कालू ने यूं ही के मन से ढोलू शिव के मंदिर पर नजर डाली थी। मंदिर की सीढ़ियों पर कोई दरवेश बैठा दिखा था। कालू ने बड़े ही श्रद्धा भाव से रेहड़ी को रोक उस दरवेश से आशीर्वाद लेने उसके चरण स्पर्श किए थे। “पाएं लागों...
राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग इक्कीस

“आप कौन ..?” सुंदरी ने प्रश्न किया था। जो आदमी सामने बैठा था उसे उसने मंदिर में पहले कभी नहीं देखा था। मंदिर में ढोलू शिव के मेले की तैयारियां चल रही थीं। क्योंकि सुंदरी हर बार ही ढोलू शिव के मेले की व्यवस्था देखती थी आज भी उसी के संदर्भ में मंदिर चली आई...
राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग बीस

कुंवर खम्मन सिंह ढोलू चिंता में डूबे हुए थे। ढोलू शिव का वार्षिक मेला भरना था। दुनिया जहान से ढोलू शिव के उपासकों को आना था। ढोलू शिव का नाम था, उनका यश था और उनकी कृपा पाकर न जाने कितने लोग फल फूल रहे थे। श्रद्धालु ढोलू शिव के इस मेले के मौके पर दिल्ली आते थे और...
राम चरन भाग चौबीस

राम चरन भाग उन्नीस

पंडित जी को शाम को मंदिर से विदा करने के बाद राम चरन अकेला ही मालिक होता था। मन प्राण में एक आह्लाद भर आता था। एक बेजोड़ कामयाबी जैसी भावना उसके भीतर भरती ही चली जाती थी। उसे लगता था – ढोलू शिव की शरण में पहुंचा वह हर ओर से सुरक्षित था। ढोलू शिव भी उसे शांत भाव...