राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग अठारह

रमा आई थी तो राजेश्वरी का तन मन खिल उठा था। दोनों कॉलेज की सहेलियां थीं। रमा ने अब अपना काम जमा लिया था। उसके अब ठाठ-बाट थे। आमदनी का ठिकाना न था। पहले तो लगा था कि रमा डूब गई। शादी के बाद राजा – उसका पति भी तो उसे छोड़ कर बंबई भाग गया था। लेकिन रमा ने अपना ही...
राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग सत्रह

आज का दिन राम चरन पर बहुत भारी पड़ा था। रात गारत होती जा रही थी लेकिन राम चरन को नींद नहीं आ रही थी। एक अजीब सी बेचैनी थी – जिसका मर्म वह जान नहीं पा रहा था। बार-बार कालू की रेहड़ी के सामने आ जुटा वो शिकारी जानवरों का झुंड उसे सताने लग रहा था। पहली बार उसने...
राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग सोलह

“क्या बात हुई?” राजेश्वरी ने प्रश्न पूछा था। “भाग गया राम चरन?” उसके कंठ स्वर कांप उठे थे। पंडित कमल किशोर की दी हल्की नोटों की गड्डी राजेश्वरी को डरा गई थी। राजेश्वरी राम चरन को लेकर न जाने क्या-क्या सपने देख चुकी थी। अगर मंदिर चल पड़ता है तो...
राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग पंद्रह

नयन विस्फरित राम चरन शाम को भी मंदिर में उन्हीं स्वयं सेवकों की भीड़ को भरते देख रहा था। अब वो यूनिफोर्म में नहीं थे। उतने डरावने नहीं लगे थे। सहज थे। हंस खेल रहे थे। पंडित कमल किशोर से संवादों में उलझे थे। प्रश्न ही प्रश्न थे उनके पास। राम चरन ने पंडित कमल किशोर की...
राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग चौदह

कालू की ठेली के सामने आज बहुत भीड़ लगी थी। राम चरन के पास आज बहुत काम था। उसने अपनी पूरी सामर्थ्य झोंकी हुई थी ताकि कालू को थालियों की टूट न पड़ जाए। कालू भी पूरी फुर्ती और चुस्ती के साथ थालियां लगा-लगा कर आगे सरका रहा था और नोट बटोर रहा था। “हिन्दू राष्ट्र बना...
राम चरन भाग अठारह

राम चरन भाग तेरह

कुंवर खम्मन सिंह ढोलू ने पंडित कमल किशोर को बुला भेजा था। राम चरन को बिना कोई सूचना दिए पंडित जी कुंवर साहब से मिलने चले गए थे। वो जानते थे कि ढोलू शिव का वार्षिक मेला लगने को था। कुंवर साहब ने उसी की बाबत बात करनी थी। पंडित जी तनिक घबराए हुए थे। राम चरन को लेकर ही...