राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग बारह

आज भी पंडित कमल किशोर लदे फदे रिक्शे में बैठ मंदिर से लौटे थे। इंतजार की घड़ियां गिनती राजेश्वरी पंडित जी को यों आया देख खिल उठी थी। उसने मान ही लिया था कि राम चरन मंदिर में था और आज भी उसने करिश्मा कर दिखाया था। कैसा होगा ये राम चरन – राजेश्वरी अनुमान लगाने लगी...
राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग ग्यारह

खाली ठेली को देख कर श्यामल ने अंदाजा लगा लिया था कि राम चरन आया था। कालू के चेहरे पर खेलते विजय भाव इस बात के गवाह थे कि उसने आज का रण जीत लिया था। आज भाग्योदय हुआ था। आज के बाद हर सपना पूरा होगा और अगर राम चरन आता रहा तो .. “आया था राम चरन?” फिर भी श्यामल...
राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग दस

इस्लाम बुरा नहीं है पर बड़ा नहीं है – पंडित कमल किशोर का दिया उत्तर राम चरन को सोने नहीं दे रहा था। प्रशांत खामोशी थी। राम चरन अकेला ही था जो जाग रहा था। उसे अपनी चलती सांसों का शोर सुनाई दे रहा था। उसे अंधेरों के उस पार खड़ी कुतुब मीनार साफ-साफ दिखाई दे रही थी।...
राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग नौ

कालू के कुर्ते पाजामे पहन राम चरन बहुत आकर्षक लग रहा था। एक बारगी पंडित कमल किशोर उसे पहचान ही न पाए थे। लेकिन समझ आने के बाद उन्हें उस पर लाढ़ उमड़ आया था। वह लौट आया था और अब पंडित जी की आस थी कि आज फिर मंदिर में कल जैसा ही कोई चमत्कार होगा और .. “चाय पी...
राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग आठ

ठेली लगाने से पहले कालू ने चारों ओर नजर दौड़ाई थी। सब कुछ शांत था। खामोशी कटीली झाड़ियों में चुपचाप बैठी थी। दो चार चिड़िया इधर उधर फुदक रही थीं और चींचीं-मींचीं खेल रही थीं। कालू ने उन्हें सायास देखा था। “मतलबी यार है, तू!” चिड़िया उसे कहती लगी थीं।...
राम चरन भाग बारह

राम चरन भाग सात

हर रोज की तरह पंडित कमल किशोर की मंदिर तक पैदल जाने की जिद हार गई थी। लगा था उनके पैर टूट गए थे। डर था कि अगर ढोलू शिव की मूर्ति राम चरन ले कर चला गया होगा तो आज उनका प्राणांत भी हो सकता था। राजेश्वरी ने रिक्शा बुला लिया था। बड़े जतन से उसने पंडित जी को रिक्शे में...