राम चरन भाग छह

राम चरन भाग छह

सूरज निकलने से बहुत पहले राम चरन जग गया था। ढोलू शिव मंदिर के परिसर में वह अकेला निफराम डोल रहा था। उसकी पैनी निगाहें ढोलू शिव मंदिर की महानता को बड़े गौर से देख रही थीं। लिखा – ढोलू शिव की मूर्ति अष्ट धातु की बनी थी। इस मंदिर को सम्राट विक्रमादित्य ने बनवाया...
राम चरन भाग छह

राम चरन भाग पांच

पंडित कमल किशोर गहरी नींद में सोते-सोते अचानक उठ कर बैठ गए थे। “रात में सब उठा ले जाएगा पापा!” वो अचानक सुमेद की आवाजें सुनने लगे थे। घोर अंधकार को चीरती सुमेद की प्रखर आवाजें एक चेतावनी की तरह चली आ रही थीं। जागते रहो – कोई कहीं आवाज देता लग रहा था।...
राम चरन भाग छह

राम चरन भाग चार

कालू अगले दिन की तैयारियों में मगन था। आज न जाने कैसा नया उत्साह था कि उसे थकान का कोई कतरा तक छू नहीं पा रहा था। पैर भाग रहे थे, हाथ दौड़ रहे थे और दिमाग तो बहारों से भरा था। कौन था राम चरन – बार-बार यही प्रश्न आता था और चला जाता था। अगर राम चरन आ जाए –...
राम चरन भाग छह

राम चरन भाग तीन

“चाबी कहां है?” राजेश्वरी ने पंडित कमल किशोर से मंदिर की चाबी न मिलने पर पूछा है। पंडित कमल किशोर अभी भी राम चरन के खयालों में ही खोए हुए थे। कैसे बताते राजेश्वरी को कि उन्होंने आज आदमी को नहीं – एक अजूबे को देखा था। कैसे बयान करते वो कि राम चरन उन...
राम चरन भाग छह

राम चरन भाग दो

“थालियां किसने धोईं?” श्यामल का सीधा प्रश्न था। चांदी की तरह चमकती थालियों को देख श्यामल का मन प्रसन्न हो उठा था। उसने निगाहें उठा कर कालू के चेहरे को पढ़ा था। एक नया गर्व बैठा था वहां। कालू के हाव भाव बदले हुए थे। वो अन्य दिनों वाला हारा थका कालू न था।...
राम चरन भाग छह

राम चरन भाग एक

कालू परेशान था। जिस आदमी को उसने ग्राहक माना था वह तो फटे हाल कोई भिखारी था। घंटों से कालू के घर के खाने की ठेली के सामने खड़ा था – अवाक। “शायद बहुत भूखा है।” कालू ने तनिक पसीजते हुए सोचा था। “पैसे नहीं होंगे।” इसलिए उसने मान लिया था कि...