डर

डर

क्या होगा?कैसे होगा,अरे!क्या हो गया!ऐसा कर लेते तो वैसा हो जाता।गलती हो गयी मुझसे। अजीब सा डर लगने लग जाता है। जब तक हमारा जीवन है,यह डर हमारा पीछा ही नहीं छोड़ता, कभी भूत-प्रेत के रूपों में तो कभी प्रकति के ख़ौफ़नाक हमलों के रूप में। हमारी या फिर ज़्यादातर हर बन्दे की यह...
नन्ही सहेली प्यारे दोस्त

नन्ही सहेली प्यारे दोस्त

भोपाल बहुत ही सुन्दर जगह है,और यहाँ हरियाली बहुत है। वर्षा से प्रभावित होने के कारण हरा-भरा मध्यप्रदेश कहलाता है। वो आपने रेडिओ पर तो सुना ही होगा…बहुत पहले एक कार्यक्रम आया करता था, जिसका नाम मुझे आज ठीक से याद नहीं आ रहा है। उस कार्यक्रम को शुरू होने से पहले कहा...
चटखारे

चटखारे

चटखारे शब्द सुनकर चेहरे पर लम्बी सी स्माइल आ जाती है, और मुहँ में पानी भर आता है। इस दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इन्सान होगा जिसे खाने-पीने का शौक न हो। हर दिन हमारा मन होता है , कि हमारी सुबह से लेकर शाम व्यंजनों में डूब जाए,काश!कोई ऐसा जहाज घर में आकर खड़ा हो जाये जो...
स्कूल और बस में क़ानू

स्कूल और बस में क़ानू

‌मौसम बदलता रहता है, कभी सर्दी आ जाती है, तो कभी गर्मी आ जाती है।पर हर मौसम का अपना  ही मज़ा और आनंद होता है,हाँ!यह बात अलग है कि बदलते मौसम में बीमारियों का आगमन हो जाता है। ऐसा कुछ वाक्या हमारे घर में भी हुआ,इस बदलते मौसम की वजह से क़ानू-मानू का एक नया रूप देखने को...
सुनहरे पल

सुनहरे पल

शरद ऋतु शुरू हो गयी है और हवाओं में हल्की-हल्की सी मिठास घुलती जा रही है। सुबह होते ही जब मैं अपने घर के आँगन के बहार निकलती हूँ, तो ये मीठी ठंडी  हवा की लहरें मेरे मन के तारों को छू कर निकल जाती हैं, और मेरा मन अपनी ही किसी दुनिया में खो  जाता है। मेरे मन की किताब का...