सपनों में क़ानू

सपनों में क़ानू

दोस्तों!यह वाला क़िस्सा बहुत ही मज़ेदार है,हुआ यूँ की एक दिन  सवेरे  बच्चे स्कूल चले गए,और पतिदेव भी जल्दी काम पर निकल गए…हमने भी अपने घर का सारा काम जल्दी ही निपटा लिया  था। उस दिन घर में केवल दो ही लोग रह गए थे, वो थी मैं और मेरी  क़ानू-जानू।...
बचपन

बचपन

बचपन तुम हो बहुत प्यारेतुमसे चंदा तारे सारेसारी गुड़ियों के बाज़ार हमारेबचपन तुम हो बहुत प्यारेसब कुछ अपनाकुछ नहीं सपनातुम्हारी मेरी यह अपनी दुनियासबसे प्यारे दोस्त थे मेरेकहाँ चले गए ,रह गए हम अकेलेआ जाओ फिर से तुम बचपनजाने न देंगे तुम्हें अब कहीं हमक्या कहते हो आओगे...
ठंडी मीठी क़ानू और हाथी

ठंडी मीठी क़ानू और हाथी

क़िस्सा गर्मियों का है, सभी ठन्डे में अन्दर ही बैठा करते थे …कमरे में। क़ानू भी  गूढ़मूढ़ हो अपने बिस्तर पर A.C की हवा के  मज़े लिया करती थी। एक दिन ऐसे ही दोपहर के वक्त मेरी बिटिया गार्गी को शैतानी सूझी और उसने कैंची लेकर क़ानू रानी की मूँछ ही काट डाली। शाम के टाइम...
मेरी माँ

मेरी माँ

माँ शब्द मन में आते ही सुन्दर, ममतामयी और एक प्यारा सा अहसास होता है। माँ जिसे इश्वर से ऊपर का दर्जा दिया गया है। वैसे तो माँ और पिता दोनों ही ईश्वर से उच्च स्थान रखते हैं, पर मेरे हिसाब से माँ की बात थोड़ी सी अलग होती है। मेरे पास माँ का व्याख्यान करने के लिए हिंदी...
मेरी प्यारी क़ानू

मेरी प्यारी क़ानू

मेरी प्यारी क़ानू आओ खेलें क़ानू सुनो जानू-मानु आओ छन-छन करती प्यार मन में भरती खेलें लुक्का-छिप्पी क़ानू की लेकर पप्पी मीठी-मीठी क़ानू मेरी भोली क़ानू आओ तितली पकड़ें कभी चूहा जकड़ें भागो-भागो-भागो आया चूहा क़ानू देखो तितली आई प्यार मन में लाई बोली तितली दीदी आओ खेलें किकली...