by Rachna Siwach | Oct 27, 2018 | Uncategorized
दोस्तों!यह वाला क़िस्सा बहुत ही मज़ेदार है,हुआ यूँ की एक दिन सवेरे बच्चे स्कूल चले गए,और पतिदेव भी जल्दी काम पर निकल गए…हमने भी अपने घर का सारा काम जल्दी ही निपटा लिया था। उस दिन घर में केवल दो ही लोग रह गए थे, वो थी मैं और मेरी क़ानू-जानू।...
by Rachna Siwach | Oct 24, 2018 | Uncategorized
बचपन तुम हो बहुत प्यारेतुमसे चंदा तारे सारेसारी गुड़ियों के बाज़ार हमारेबचपन तुम हो बहुत प्यारेसब कुछ अपनाकुछ नहीं सपनातुम्हारी मेरी यह अपनी दुनियासबसे प्यारे दोस्त थे मेरेकहाँ चले गए ,रह गए हम अकेलेआ जाओ फिर से तुम बचपनजाने न देंगे तुम्हें अब कहीं हमक्या कहते हो आओगे...
by Rachna Siwach | Oct 23, 2018 | Uncategorized
क़िस्सा गर्मियों का है, सभी ठन्डे में अन्दर ही बैठा करते थे …कमरे में। क़ानू भी गूढ़मूढ़ हो अपने बिस्तर पर A.C की हवा के मज़े लिया करती थी। एक दिन ऐसे ही दोपहर के वक्त मेरी बिटिया गार्गी को शैतानी सूझी और उसने कैंची लेकर क़ानू रानी की मूँछ ही काट डाली। शाम के टाइम...
by Rachna Siwach | Oct 20, 2018 | Uncategorized
माँ शब्द मन में आते ही सुन्दर, ममतामयी और एक प्यारा सा अहसास होता है। माँ जिसे इश्वर से ऊपर का दर्जा दिया गया है। वैसे तो माँ और पिता दोनों ही ईश्वर से उच्च स्थान रखते हैं, पर मेरे हिसाब से माँ की बात थोड़ी सी अलग होती है। मेरे पास माँ का व्याख्यान करने के लिए हिंदी...
by Rachna Siwach | Oct 14, 2018 | Uncategorized
मेरी प्यारी क़ानू आओ खेलें क़ानू सुनो जानू-मानु आओ छन-छन करती प्यार मन में भरती खेलें लुक्का-छिप्पी क़ानू की लेकर पप्पी मीठी-मीठी क़ानू मेरी भोली क़ानू आओ तितली पकड़ें कभी चूहा जकड़ें भागो-भागो-भागो आया चूहा क़ानू देखो तितली आई प्यार मन में लाई बोली तितली दीदी आओ खेलें किकली...