by Rachna Siwach | Nov 20, 2018 | Uncategorized
आजकल सभी के हाथ में आपको मोबाइल फ़ोन पक्का मिलेगा। बड़ा हो या छोटा मोबाइल बगैर तो ज़िन्दगी चलती ही नहीं है।जब कभी हम बच्चे हुआ करते थे, तो न तो मोबाइल फोनों का चक्कर था,और न ही कोई फेसबुक एकाउंट हुआ करते थे।आज का समाज हमारा फेसबुक,व्हाट्सएप्प और अन्य सोशल मीडिया में...
by Rachna Siwach | Nov 20, 2018 | Uncategorized
बाज़ार पूरी तरह से सजे हुआ करते थे,वही भीड़-भाड़ बाज़ार में वही रौनक मेले हुआ करते थे,और बाज़ार सजे क्या हुआ करते थे ,आज भी सभी तरह के बाज़ारों में अलग- अलग ही रौनक मेला होता है। अक्सर सुनने में आता है,”अरे!फलाँ बाज़ार चले जाना वहाँ सौदा सस्ता भी मिलता है, और मोल भाव...
by Rachna Siwach | Nov 16, 2018 | Uncategorized
हमारा पारिवारिक जीवन और क़ानू -मानू के साथ मस्ती-भरे दिन यूँहीं चल रहे थे, वो ही सवेरे बच्चों का स्कूल के लिए जाना, और हमारा और क़ानू का दीदी भईया को टाटा बोलने स्टॉप तक जाना। याद से चैन और पट्टे में ही लेकर जाया करते थे हम क़ानू को। वैसे तो कभी-कभी बिना चैन और पट्टे के...
by Rachna Siwach | Nov 16, 2018 | Uncategorized
अंग्रेज़ी के एक नॉवेल के बारे में तो सुना होगा आप सब ने,”,फ़ॉर one मोर डे”इस उपन्यास के लेखक का नाम तो मुझे याद न है, पर इस उपन्यास की कहानी का अंश मुझे अपने किसी मित्र से सुनने को मिला, सच!दिल को छू गया। इस कहानी के इस छोटे से अंश की मैंने भी अपनी निजी...
by Rachna Siwach | Nov 13, 2018 | Uncategorized
बचपन से हमनें कभी कुत्ते नहीं पाले, हाँ! छोटे थे, तब मेरे बड़े भाईसाहब को बिल्ली पालने का बेहद शौक था। पर हमें तो न कभी बिल्ली और न ही कभी कुत्ते ही रास आया करते थे। विवाह के पश्चात भी भोपाल में मेरी ससुराल मैं हमारा स्वागत परिवारजनों से हुआ था, तो उन परिवारजनों में,...