अंधेरे ने हमें मात्र दो चलती फिरती छायाओं में बदल दिया है। गाड़ी तक चलकर आने में खामोशी ही साथ देती रही है। मैं सोफी के आग्रह को उलट पलट कर देखता रहा हूँ। अपने आप को कोसता रहा हूँ और सोफी के खो देन…