by Rachna Siwach | Jun 7, 2019 | Uncategorized
” दिखे सै! तन्ने मेरा पैर सूजन लाग रया सै!”। रमेश अपनी माँ से बोला था.. और रमेश के मन में यह भी डर बैठ गया था.. कि डॉक्टर ने सही कहा था.. इस बार पैर पक्का से ही कट जाता!”। पैर के इलाज के लिए एकबार फ़िर से पैसों का चक्कर पड़ गया था.. पिता का राज़...
by Rachna Siwach | Jun 6, 2019 | Uncategorized
रमेश एकदम ही money-minded और self-centered आदमी के रूप में बाहर निकल कर आ रहा था। शुरू से जब से रामलालजी का घर में राज़ था.. तो ऐसा कभी लगा नहीं था.. लेकिन पिता का साया हटते ही.. सबकी असलियत सामने आती जा रही थी.. अपने आप को चिल्ला-चिल्ला कर शुरू से ही बिज़नेस मैन...
by Rachna Siwach | Jun 6, 2019 | Uncategorized
रंजना का किस्सा अब पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था.. चाहे वो इंदौर में हो, या फ़िर दुबई में.. रमेश उसके दिमाग़ से उतर ही गया था,.. रमेश के साथ बिताए सारे पल रंजना झटके से भुलाकर अपने जीवन में अब आगे बढ़ चुकी थी। एकबार के ही निर्णय में उसनें रमेश को अपने जीवन से निकाल...
by Rachna Siwach | Jun 4, 2019 | Uncategorized
” Hello! हाँ! हम बात कर रहे थे.. दिल्ली से! ज़रा जल्दी में हैं! तुम अपने कुत्ते को लेकर दिल्ली आ सकती हो क्या..! हमारे पास थोड़े दिनों के लिये!’। भाईसाहब का दिल्ली से हमारे लिए फ़ोन आया था.. पर हमनें बिना ही कोई जवाब दिए फ़ोन काट दिया था। ” Hello!...
by Rachna Siwach | Jun 4, 2019 | Uncategorized
नाना आए नानी आईं मौसा आए मौसी आईं और मामा संग माँ तुम भी आईं। खोया ननिहाल बना कर बैठी थी माँ! खोया हुआ चित्रण मैं करती.. नानी की तुम लाडो थी..माँ नाना की तुम राजदुलारी मौसी मामा चिपकते तुम संग बहन भाई की तुम बहन थीं प्यारी राजघराने सा ननिहाल था मेरा जिस में तुम थीं...
by Rachna Siwach | Jun 4, 2019 | Uncategorized
हँसी ठहाके तुम संग मैया याद बहुत अब आते हैं हँसी फव्वारे और ठिठोली करते तुम संग बचपन में हँसते-हँसते बल पड़ जाते तुम संग सबके पेटों में याद है मुझको भली भाँति से हँसते-हँसते आँख तुम्हारी हो जातीं थीं धागा सी उन धागे सी आँखों से तुम लगने लगतीं नेपाली सी वही चेहरा याद...