खानदान 138

खानदान 138

” दिखे सै! तन्ने मेरा पैर सूजन लाग रया सै!”। रमेश अपनी माँ से बोला था.. और रमेश के मन में यह भी डर बैठ गया था.. कि डॉक्टर ने सही कहा था.. इस बार पैर पक्का से ही कट जाता!”। पैर के इलाज के लिए एकबार फ़िर से पैसों का चक्कर पड़ गया था.. पिता का राज़...
खानदान 138

खानदान 137

रमेश एकदम ही money-minded और self-centered आदमी के रूप में बाहर निकल कर आ रहा था। शुरू से जब से रामलालजी का घर में राज़ था.. तो ऐसा कभी लगा नहीं था.. लेकिन पिता का साया हटते ही.. सबकी असलियत सामने आती जा रही थी.. अपने आप को चिल्ला-चिल्ला कर शुरू से ही बिज़नेस मैन...
खानदान 138

खानदान 136

रंजना का किस्सा अब पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था.. चाहे वो इंदौर में हो, या फ़िर दुबई में.. रमेश उसके दिमाग़ से उतर ही गया था,.. रमेश के साथ बिताए सारे पल रंजना झटके से भुलाकर अपने जीवन में अब आगे बढ़ चुकी थी। एकबार के ही निर्णय में उसनें रमेश को अपने जीवन से निकाल...
कानू और चलचित्र

कानू और चलचित्र

” Hello! हाँ! हम बात कर रहे थे.. दिल्ली से! ज़रा जल्दी में हैं! तुम अपने कुत्ते को लेकर दिल्ली आ सकती हो क्या..! हमारे पास थोड़े दिनों के लिये!’। भाईसाहब का दिल्ली से हमारे लिए फ़ोन आया था.. पर हमनें बिना ही कोई जवाब दिए फ़ोन काट दिया था। ” Hello!...
ननिहाल

ननिहाल

नाना आए नानी आईं मौसा आए मौसी आईं और मामा संग माँ तुम भी आईं। खोया ननिहाल बना कर बैठी थी माँ! खोया हुआ चित्रण मैं करती.. नानी की तुम लाडो थी..माँ नाना की तुम राजदुलारी मौसी मामा चिपकते तुम संग बहन भाई की तुम बहन थीं प्यारी राजघराने सा ननिहाल था मेरा जिस में तुम थीं...
ननिहाल

हँसी ठहाके

हँसी ठहाके तुम संग मैया याद बहुत अब आते हैं हँसी फव्वारे और ठिठोली करते तुम संग बचपन में हँसते-हँसते बल पड़ जाते तुम संग सबके पेटों में याद है मुझको भली भाँति से हँसते-हँसते आँख तुम्हारी हो जातीं थीं धागा सी उन धागे सी आँखों से तुम लगने लगतीं नेपाली सी वही चेहरा याद...