हँसी ठहाके
तुम संग
मैया
याद बहुत अब
आते हैं
हँसी फव्वारे
और ठिठोली
करते तुम संग
बचपन में
हँसते-हँसते
बल पड़
जाते
तुम संग
सबके पेटों
में
याद है
मुझको
भली भाँति
से
हँसते-हँसते
आँख तुम्हारी
हो जातीं
थीं धागा
सी
उन धागे सी
आँखों से
तुम लगने
लगतीं नेपाली
सी
वही
चेहरा याद
जो आया
मन
एकबार फ़िर
मुस्काया
काश! कि
फ़िर से लौट
कर आएं
हँसी फव्वारे
और दिन
बचपन के
फ़िर तुम
बैठो संग
तख्त पर
और फिर
छूटें वही
हँसते फव्वारे।