by Rachna Siwach | Jun 15, 2019 | Uncategorized
प्रहलाद का दाखिला घर में एक टेलीविज़न शो की तरह से हो गया था.. बजाय बच्चे को सही बताने के, उसकी मज़ाक ही बना कर रख दी थी। ननिहाल में भी ख़बर लागातार जा रही थी.. और उन्हें भी उम्मीद थी.. कि प्रहलाद का दाखिला रुक ही नहीं सकता। हालाँकि प्रहलाद के ममेरे भाई-बहन प्रहलाद को...
by Rachna Siwach | Jun 12, 2019 | Uncategorized
प्रहलाद को अपने दाख़िले की चिंता लगातार सता रही थी.. माँ की बात तनिक भी दिमाग़ में नहीं बैठी थी.. कि इस बार इतने पैसों का मिलना मुश्किल काम है! दिमाग़ में न जाने किस दोस्त ने education loan वाली बात डाल दी थी.. ” माँ! मेरे दिमाग़ में लोन लेने का ख्याल आया है…...
by Rachna Siwach | Jun 11, 2019 | Uncategorized
सुनीता विनीत को लेकर एकदम सही सोच रही थी.. अब परिवार ही ऐसा था.. पैसा प्रेमी। पर यहाँ कोई नई बात नहीं थी.. हर बिज़नेस परिवार में, जहाँ पर हिस्से का विभाजन सही तरह से नहीं होता.. वहाँ रिश्तों में मन-मुटाव आ ही जाता है.. पैसों की ज़रूरत किसे नहीं होती! सभी को तो चाहये.....
by Rachna Siwach | Jun 9, 2019 | Uncategorized
दोनों हाथों से परिवर्तन को रोके हुए.. रामलाल विला की मालकिन.. श्रीमती दर्शनाजी! भला परिवर्तन की हिम्मत थी.. कि मैडम के होते हुए.. घर में दाखिल हो जाता। रमेश के पैर का इलाज तो हो चुका था.. डॉक्टर ने रॉड निकलवाने के लिए कहकर छोड़ दिया था.. अब आगे तो रमेश की ही मर्ज़ी...
by Rachna Siwach | Jun 9, 2019 | Uncategorized
” या हमनें बसन कोनी दे..! बेरा न के बन री है..!।अपने-आप में”। दर्शनाजी ने रमा को लेकर सुनीता से कहा था.. कि घर बसाने के रास्ते में रोड़ा है..! ये! जब से रामलालजी का स्वर्गवास हुआ है.. पता नहीं कहाँ की प्रधानमंत्री बन कर दिखा रही है! ” सीधी सी बात तो...
by Akhileshwar Mishra | Jun 7, 2019 | Uncategorized
देखा मैंने इक श्रमिक जो निज कर्म पर इतरा रहा था कर्म को ही धर्म माने नित निरन्तर जी रहा था शून्य सा लगता मुझे वो जिसका कोई मूल्य न था पर संग जिसके वो खड़ा था उस सा कोई बहुमूल्य न था अपने लहू से सींचकर वो धरती से सोना बनाता पर निरा अभिशिप्त था वो खुद को कुछ न दे था पाता...