जीने की राह बाईस

जीने की राह बाईस

आश्रम की अकूत आमदनी है – यह मुझे नदिया ने बताया है। और नदिया ने ही मुझे समझाया है कि मैं क्यों न अपने चारों बेटों को यहां बुला लूं और उन्हें मठाधीश बना कर देश के चारों छोरों पर बिठा दूं ओर फिर मैं अपना नाम और काम इनके साथ जोड़ कर अपनी एक अलग पहचान बना लूँ। लेकिन...
जीने की राह इक्कीस

जीने की राह इक्कीस

न जाने क्यों आज मैं जल्दी जगा हूँ। न जाने क्यों आज मैं बहुत प्रसन्न और प्रफुल्लित हूँ। सूरज तो न जाने कब उगेगा पर मेरे मन आकाश पर तो अजीब और अनेकों सूरज उग आये हैं। और न जाने क्यों मैं .. “इतनी जल्दी नहाने चले आये आज?” नदिया ने प्रश्न पूछा है। “आज...
जीने की राह बाईस

जीने की राह बीस

परोपकारी नीम के पेड़ की गहन छाया में मैं आ बैठा हूँ! गुणों की खान इस पेड़ से मेरा गहरा रिश्ता है, मेल मिलाप है और हम दोनों सहोदर हैं। देना और देते ही रहने का तो आनंद ही अलग है। हम दोनों में होड़ लगी है कि कौन कितना दे और कम से कम ले। जीतेगा तो यही – मैं जानता...
जीने की राह उन्नीस

जीने की राह उन्नीस

“मैं क्या करूं, स्वामी जी! कहां जाऊं?” बबलू मेरे पैरों में पड़ा गिड़गिड़ा रहा है। “पी लेता हूँ तो दो पल जी लेता हूँ वरना तो मेरा जीने का मन ही नहीं करता स्वामी जी!” वह कह रहा है। मैं भी क्या करूं बबलू – मैंने भी उसे वही प्रश्न पूछा है।...
जीने की राह इक्कीस

जीने की राह अठारह

“तुम क्या सोच रहे हो कि तुम मुझे भूल गये हो? क्या तुम्हें याद नहीं हमारा वो मिलन पीतू?” गुलनार का प्रश्न है। मात्र इस प्रश्न ने ही मुझे जगा दिया है और झकझोर दिया है। हॉं हॉं मैं पीतू हूँ .. मैं गुलनार का पीतू हूँ .. मैं .. “हॉं हॉं! वो हमारा प्रथम...
जीने की राह सत्रह

जीने की राह सत्रह

शनिवार का मुझे बेसब्री से इंतजार रहता है। न जाने क्यों कीर्तन के इन पलों में मैं प्रभु के गुण गान में खोया और सोया सोया सा जीवन के उन सोपानों को चढ़ जाता हूँ जो अन्य प्रकार से दुर्लभ होते हैं। मन रम जाता है भक्ति में, जम जाता है पूजा में और बढ़ चढ़ कर पुकारता है ईश्वर...