by Rachna Siwach | Apr 10, 2019 | Uncategorized
रमेश ने सफ़ारी गाड़ी बेचने की पूरी प्लांनिंग कर ली थी.. और जगह -जगह अब बताने भी लगा था,” अरे! ये अपने पास गाड़ी है.. न सफ़ारी! ये बेचनी है।” गाँव में भी जहाँ से रमेश ने यह सफ़ारी गाड़ी ख़रीदी थी.. यह ख़बर पहुँचा दी,” इस गाड़ी को बिकवा दे ने!.. इब कोनी चलाऊं!”। रमेश यह...
by Rachna Siwach | Apr 9, 2019 | Uncategorized
अब तीन हिस्सेदार तैयार थे.. विनीत, रमेश और दर्शनाजी। दर्शनाजी हालाँकि माँ थीं, देखजाय तो उन्हें हिस्से की क्या ज़रूरत थी.. पर अब विनीत के सामने खड़े होकर कहने लगीं थीं,” विनीत! मेरा फैसला कर दे! मन्ने मेरा तीसरा दे! दे!”। दर्शनाजी अब विनीत के सामने खड़े होकर अपने...
by Rachna Siwach | Apr 8, 2019 | Uncategorized
रामलाल विला में अब सभी पैसों से संवंधित चीज़ों का ठेकेदार अब विनीत ही हो गया था.. कारण यह था, कि बाबूजी कोई भी बटवारा नहीं करके गए थे.. फैक्ट्री का सारा financial control अब विनीत के ही हाथ मे था। रमेश को तो फैक्ट्री के पैसों के बारे में थोड़ा बहुत बस, उड़ती सी ख़बर...
by Rachna Siwach | Apr 5, 2019 | Uncategorized
रामलालजी की शोक सभा समाप्त हो चुकी थी.. घर आए सभी मेहमान अपने-अपने घरों को चले गए थे। अब रामलालजी के घर में एक नए तरह के माहौल ने जन्म ले लिया था.. जिस माहौल में सुकून और ख़ुशी दोनों ही झलक रहीं थीं। रमेश को भो रंजना और उसकी माँ ने हिस्से के लिये सिखाना भड़काना शुरू...
by Rachna Siwach | Apr 5, 2019 | Uncategorized
जब भी तुम आती हो कुछ कहना चाहती हो मैं तुम्हें समझे बगैर ही ख़ुश हो जातीं हूँ कि तुम मिलने आ जाती हो पर तुम्हारी बातों में कितनी सच्चाई झलकती है.. माँ!! तुम्हारा यूँ आना और मुझसे चुपके से कुछ कहना सच हो जाता है फ़िर अचानक से गायब हो जाती हो एक बार फ़िर मुझे तुम याद...