by Rachna Siwach | May 26, 2019 | Uncategorized
मुझे हर शाम की तन्हाई में तुम्हारा चेहरा दिखने लगा है माँ! मेरा बचपन तुम्हें सोचकर हर शाम की तन्हाई में लौटने लगा है माँ ऐसा प्रतीत होता है मानो शाम को थककर तुम्हारे पहलू में फ़िर एकबार लौट रही हूँ मैं तुम्हारे गुलाब से कोमल स्पर्श से एक बार फ़िर नया होंसला मिलता है...
by Rachna Siwach | May 25, 2019 | Uncategorized
” आप मेरी बात मान जाओ! वो लड़की ग़ुस्से में और थाने से ही बोल रही थी.. वो और कहीं भी नहीं थी.. अगर आप अभी पुलिस-स्टेशन नहीं पहुँचे तो वो यहाँ घर आ जाएगी, और वो तमाशा खड़ा होगा.. जो दुनिया देखेगी!”। रमेश एकबार सुनीता की बात पर कुछ कहने ही वाला था.. पर...
by Rachna Siwach | May 24, 2019 | Uncategorized
” ये क्या कह रही हैं! आपके हस्बैंड के बारे में.. आप उन्हें थाने भेज दिजीये!”। पुलिस वाले ने सुनीता से बात करते वक्त कहा था। ” लो फ़ोन कर लो बात!”। सुनीता ने रमेश को फ़ोन पकड़ाते हुए, कहा था। ” नहीं मुझे नहीं करनी किसी से भी बात! तू ही कर...
by Rachna Siwach | May 23, 2019 | Uncategorized
याद तुम्हारी इतनी आई हर रिश्ते मैं तुम्हें ढूँढते मैं पगलाई नहीं मिलीं तुम मुझे और किसी भी रिश्ते में माँ हार थककर तुम्हें खोकर मैं घबराई कोई और रस्ता अपने आने का सोच समझ कर निकाल दो माँ तुम कहीं ये शेष जीवन तुम्हें ढूँढते निकल न...
by Rachna Siwach | May 23, 2019 | Uncategorized
देखो! लिख रहीं हूँ मैं याद आ रही है तुम्हारी आज बहुत माँ!! तुम होतीं तो आज मेरी लेखनी पढ़ तारीफों के पुल बाँधती बेशक कैसा भी हुनर उभरा है मेरा माँ! तुम शब्दों की चाशनी से उसे रोज़ साँवरतीं तुम्हारा चेहरा देख मैने कलम पकड़ी है माँ! जानती हूँ मेरी कलम में समा कर प्रेरणा...