खानदान 125

खानदान 125

रनेश घर आने के साथ ही पसीना-पसीना हो गया था। टेंशन में आकर सुनीता के आगे बोल उठा था.. ” अरे! किसी काले से आदमी के साथ मोटरसाइकिल पर भाग गई! मैं देखता ही रह गया.. पता करना पड़ेगा कौन था, साला..!!”। रमेश रंजना को लेकर बोला था। और यह भी बोला.. ” भाग कर...
खानदान 125

खानदान 124

” अब तो सब-कुछ बेच-वेच कर दुबई जाने का इरादा है। लडक़ी पीछे पड़ रही है.. मेरे साथ दुबई चलो!”। यह ख़बर अब पूरे घर में आग की तरह फैल गई थी। सुनीता ने दुबई जाने का जैसे गाना ही बना डाला था। अब तो हर घर के हर आदमी ने रमेश और दुबई का जैसे जुमला ही बना डाला था।...
रेल

रेल

माँ..!! कहाँ हो तुम मेरी आवाज़ सुन आजाओ न! कितनी तेज़ी से आवाज़ हुई कि तुम्हारी रेल निकल गई कौन सी रेल में बैठ निकल गईं तुम मैं देखती ही रह गई इतनी तेज़ी से क्यों चढ़ गईं थीं माँ तुम छोड़ कर सबको दौड़ी चली आई थी मैं पर तुम्हारी रेल निकल गई अब हर रेल के आते-जाते...
रेल

विदा

बहुत ख़ुश कर गईं हो माँ अब तुम मुझको ढ़ेर लिबास दे विदा मेरी भर गईं हो तुम तो रोज़ नया तुम्हारा आशीर्वाद पहन अब घूमूँ फिरूँ मैं मन ख़ुश हो गया ऐसी विदा भर गई हो तुम तो पर तुम यह सब पहनतीं तो मन ज़्यादा हँसता तुम्हें रोज़ सजा-धजा देख सच! मन खिल उठता आजाओ माँ! भूल से...
खानदान 125

खानदान 123

एक बहन का तो घर बस गया था, दूसरी बहन इंतेज़ार में बैठ-बैठ कर थक गई थी। बेचारी रंजना ने सीधे-सीधे भी रमेश से हिस्से का पूछ लिया था… पर कोई जवाब ही नहीं मिल पा रहा था। शादी-शुदा बहन के ठाठ-बाट देख.. रंजना की परेशानी बढ़ती जा रही थी। ” आपको पता है! ये रिश्ता मेरे...