बहुत टेस्टी, बहुत बढ़िया

बहुत टेस्टी, बहुत बढ़िया

अरे! वाह! बहुत टेस्टी बहुत अच्छा चटपटा बहुत अच्छा! सबकुछ एकदम बढ़िया मज़ा आ गया नहीं भूलेंगे यह स्वाद बहुत अच्छा बहुत टेस्टी इन शब्दों को भोजन बनाते वक्त याद कर मेरा मन तुम्हें याद कर छटपटा गया माँ..!! मसाले और छोंक की उड़ती हुई खुशबू में मुझे एकबार फ़िर तुम याद आ गईं...
खानदान 133

खानदान 133

” कहाँ है! वो pen-drive..!!” मुझे तो कहीं भी नहीं मिल रही है! अभी चाहिये मुझे! मेरा कुछ ज़रूरी सामान है! उसमें!”। रमेश ज़ोर से चिल्ला कर pen-drive के लिए बोला था.. जो उसे कहीं भी सारे ढूँढने पर नहीं मिल रही थी। सुनीता भी यह सुनकर आश्चर्यचकित हो रही...
हकीम

हकीम

अस्वस्थ हूँ मैं याद तुम्हें आज करती हूँ! कहाँ से लाऊं नीम हकीम तुम जैसा कोई मिलता नहीं तुम्हारे स्पर्श और बोलों से ठीक हो जाया करती तुम जैसा हाकिम कोई अब मिलता नहीं इस चलती हवा के संग घूम फ़िर और छुपकर तुम आज मेरे लिए हकीम बन आ जाओ माँ! चुपके से कोई नई दवा दे मेरा...
खानदान 133

खानदान 132

” देखा! मैने कहा था.. न! कि अगर ये दुबई चली गयी, और इसे वहाँ की हवा लग गई.. तो ये इसे हमेशा के लिये छोड़ देगी!”। सुनीता ख़ुश थी.. कि लड़की भाग गई.. और यह ख़ुशी सुनीता अपनी हर जगह बाँटती फ़िर रही थी। और तो और मुकेशजी और अनिताजी को भी पता चल चुका था.. कि...
खानदान 133

खानदान 131

” तन्ने बेरा सै! दिल्ली में बहुत बड़ा काली का मंदिर सै! अरे! अपनी वा सै! ने! वा काली ने माने सै!” रमेश दर्शनाजी के सामने रंजना को लेकर शेख़ी बघार रहा था.. दिल्ली में काली के मंदिर के विषय में बताते हुए.. रंजना के बारे में भी बोले जा रहा था.. कि वो काली को...