ननिहाल

ननिहाल

नाना आए नानी आईं मौसा आए मौसी आईं और मामा संग माँ तुम भी आईं। खोया ननिहाल बना कर बैठी थी माँ! खोया हुआ चित्रण मैं करती.. नानी की तुम लाडो थी..माँ नाना की तुम राजदुलारी मौसी मामा चिपकते तुम संग बहन भाई की तुम बहन थीं प्यारी राजघराने सा ननिहाल था मेरा जिस में तुम थीं...
ननिहाल

हँसी ठहाके

हँसी ठहाके तुम संग मैया याद बहुत अब आते हैं हँसी फव्वारे और ठिठोली करते तुम संग बचपन में हँसते-हँसते बल पड़ जाते तुम संग सबके पेटों में याद है मुझको भली भाँति से हँसते-हँसते आँख तुम्हारी हो जातीं थीं धागा सी उन धागे सी आँखों से तुम लगने लगतीं नेपाली सी वही चेहरा याद...
खानदान 135

खानदान 135

Pendrive का मामला हमेशा के लिए ख़त्म हो चुका था… सुनीता ने यह बात अपने ही अंदर रखी थी.. कि प्रहलाद ने pendrive flush कर दी है। बात कहीं नहीं जाने दी थी। लेकिन उस pendrive के अंदर ऐसा क्या देखा था..  प्रहलाद ने जो उसे बिना ही किसी को बताए pendrive को flush करना...
खानदान 135

खानदान 134

” अभी तो यह pendrive का ही मामला है! सोच कर देख! आगे अगर लड़की को लेकर कोई बात निकल आई.. तो कितना हंगामा होगा! तेरे माँ-बाप तो पढ़े-लिखे हैं! तू उनसे बात करके कोई रास्ता निकाल..! इसके ख़िलाफ़ कोई पंचायत बैठा! तभी ये सीधा हो पाएगा!”। रमा ने सुनिता को...
गर्म हवा

गर्म हवा

इन गर्म हवा के थपेड़ों में मन ठंडक की चाह नहीं करता अरे! तुम गर्म हवा संग कभी इधर गईं कभी उधर गईं मन तुम्हें ढूंढता भागता रहता शरद ऋतु से उड़ान भर तुम उड़ीं चलीं तुम उड़ीं चलीं दो शरद ऋतु पार कर माँ अब इन लुओँ में तुम आ खड़ीं तुम आ खड़ीं खड़ीं तो मेरे द्वार पर हो तुम...