खानदान 139

खानदान 139

” या हमनें बसन कोनी दे..! बेरा न के बन री है..!।अपने-आप में”। दर्शनाजी ने रमा को लेकर सुनीता से कहा था.. कि घर बसाने के रास्ते में रोड़ा है..! ये! जब से रामलालजी का स्वर्गवास हुआ है.. पता नहीं कहाँ की प्रधानमंत्री बन कर दिखा रही है! ” सीधी सी बात तो...
खानदान 139

खानदान 138

” दिखे सै! तन्ने मेरा पैर सूजन लाग रया सै!”। रमेश अपनी माँ से बोला था.. और रमेश के मन में यह भी डर बैठ गया था.. कि डॉक्टर ने सही कहा था.. इस बार पैर पक्का से ही कट जाता!”। पैर के इलाज के लिए एकबार फ़िर से पैसों का चक्कर पड़ गया था.. पिता का राज़...
खानदान 139

खानदान 137

रमेश एकदम ही money-minded और self-centered आदमी के रूप में बाहर निकल कर आ रहा था। शुरू से जब से रामलालजी का घर में राज़ था.. तो ऐसा कभी लगा नहीं था.. लेकिन पिता का साया हटते ही.. सबकी असलियत सामने आती जा रही थी.. अपने आप को चिल्ला-चिल्ला कर शुरू से ही बिज़नेस मैन...
खानदान 139

खानदान 136

रंजना का किस्सा अब पूरी तरह से ख़त्म हो चुका था.. चाहे वो इंदौर में हो, या फ़िर दुबई में.. रमेश उसके दिमाग़ से उतर ही गया था,.. रमेश के साथ बिताए सारे पल रंजना झटके से भुलाकर अपने जीवन में अब आगे बढ़ चुकी थी। एकबार के ही निर्णय में उसनें रमेश को अपने जीवन से निकाल...
कानू और चलचित्र

कानू और चलचित्र

” Hello! हाँ! हम बात कर रहे थे.. दिल्ली से! ज़रा जल्दी में हैं! तुम अपने कुत्ते को लेकर दिल्ली आ सकती हो क्या..! हमारे पास थोड़े दिनों के लिये!’। भाईसाहब का दिल्ली से हमारे लिए फ़ोन आया था.. पर हमनें बिना ही कोई जवाब दिए फ़ोन काट दिया था। ” Hello!...