by Rachna Siwach | May 30, 2019 | Uncategorized
कुछ याद है.. माँ! तुम्हें जब हमारा बचपन था.. और हमारा केवल पाँच सदस्यों का एक छोटा सा घोंसला हुआ करता था.. उस वक्त कितनी अनोखी और प्यारी कहानी हुआ करती थी.. हमारी। पिताजी फौज में अफसर थे.. मज़े के दिन और बिंदास ज़िन्दगी चल रही थी.. धीरे-धीरे तुम्हारे हाथ का लज़ीज़...
by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
अब सुनीता को लेकर रमेश का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था। और वो ख़ुद ही रंजना को लेकर गहरे राज़ खोल रहा था। सुनीता के सामने कुछ इस तरह से खोले थे.. रमेश ने सारे राज़.. ” अरे! इसकी मौसी कोई मंत्री-वन्त्री नहीं है! झूठ बोलती है! ये! छोटे से फ्लैट में पड़ी है.. बोलती...
by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
फूलों के सुन्दर बागीचे में हर भोर तुम्हें ढूंढ़ता है मन वो तुम्हारे हाथ हिलाते हुए मुस्कुराकर टहलने को देखने के लिये तरसता है मन तुम्हारे बगैर यह सुन्दर बागीचा सुनसान लग रहा है माँ! अपने भोर के टहलने से एकबार फ़िर इस फूलों भरे बागीचे को गुलज़ार कर दो माँ..!! स्वर्गलोक...
by Rachna Siwach | May 29, 2019 | Uncategorized
आकर कहाँ चली जाती हो तुम क्यों दिखकर छुप जाती हो तुम हो ही नहीं अब तुम सच तो यह है! केवल मन का वहम बन दिख जाती हो तुम अब तुम बिन जीना सीख लिया है.. मैंने! पर फ़िर भी मेरा वहम बन दिख जाती हो तुम...
by Rachna Siwach | May 28, 2019 | Uncategorized
शादी-ब्याह का भी अपना एक अलग ही मज़ा है! और सर्दियों में हो रही शादी की तो बात ही कुछ और होती है.. असली खाने-पीने और जायके का मज़ा तो सर्दियों में ही आता है। शरद ऋतु में शुरू होकर शादियां अब तक यानी के जून के महीने तक तो चलती ही हैं। शादी-ब्याह में आना-जाना हो ही जाता...