by Major Krapal Verma | May 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
नब्बो बकरी चराने नहीं आई थी। धीरज बेचैन था। वह बार-बार गांव की ओर देख रहा था। खेत में काम करने का उसका मन ही न कर रहा था। धीरज चिंता मग्न था। क्या हुआ जो नब्बो नहीं आई – वह जानने की जिज्ञासा से लड़ रहा था। उसे बुरे-बुरे खयाल सता रहे थे। क्या उनके प्यार की खबर...
by Major Krapal Verma | Apr 3, 2026 | स्वामी अनेकानंद
सूनी-सूनी आंखों से राम लाल ठहर गए दृश्य का जायजा ले रहा था। कल्लू चुनावों में व्यस्त था। उसके पास मग्गू और आचार्य घनानंद जैसे दो समर्थ खिलाड़ी थे। उसका चुनाव जीतना तय था। कदम मोहन मकीन की सेवा में व्यस्त था। स्वामी अनेकानंद का झूठ पर्ण कुटीर में तालों के भीतर बंद था।...
by Major Krapal Verma | Mar 28, 2026 | स्वामी अनेकानंद
आने वाले चुनावों का प्रचार प्रसार जोर पकड़ता चला जा रहा था। बबलू और पल्लवी जी जान से चुनाव की तैयारी में जुटे थे। आने वाले इतवार को पल्लवी ने पूरी बंबई में नारी शक्ति सभाओं का किया था। पूरा प्रोग्राम तीन भागों में बंटा था। एक भाग पल्लवी देख रही थी तो दूसरा भाग बबलू के...
by Major Krapal Verma | Mar 24, 2026 | स्वामी अनेकानंद
इतवार का दिन था। छुट्टी थी। सब शांत था। लेकिन कल्लू के दिल दिमाग में आज तूफान उठने बैठने लग रहे थे। वह पूरी तरह से आंदोलित था। उसे भी अब राम लाल की तरह एक चेला तैयार करना था। वह होटल के कमरे में पहुंचा था तो किशोर कामलीवाल उसे भाई के तैयार किए परिधान में सजा वजा मिला...
by Major Krapal Verma | Mar 20, 2026 | स्वामी अनेकानंद
तोचीगढ़ में आकर तांगा रुका था तो आनंद खबरदार हो गया था। सबसे पहले आनंद को चिंता हुई थी कि उसने जो बेशकीमती जूते पहने थे, तांगे से उतर कर जमीन पर पड़ते ही मैले हो जाएंगे। गांव के लोग तांगे के आस पास इकट्ठे हो गए थे। सभी ने मन में मान लिया था कि वो कोई अजनबी नहीं बंबई...