स्वामी अनेकानंद भाग 70

स्वामी अनेकानंद भाग 70

तप:पूत काया, उजड़े बिगड़े बाल, लम्बी लटक आई दाड़ी, निस्तेज हुई आंखें और छुहारे सी सूख गई सुनहरी काया स्वामी जी की तपस्या के प्रमाण थे। घोर तप किया था – स्वामी जी ने – ये अब सर्व मान्य सच था। घोर निराशा के दलदल से बेहोश हुए अरबपति मोहन मकीन का यों साबुत बच...
स्वामी अनेकानंद भाग 70

स्वामी अनेकानंद भाग 69

“गुरु! टेलीग्राम आया है।” कदम ने राम लाल को सूचना दी थी। “बाबू कह रहा है कि आ कर ले जाएं अपना टेलीग्राम।” उसने आदेश को कह सुनाया था। राम लाल जैसे नींद से जागा हो – इस प्रकार की प्रतिक्रिया हुई थी। नई नवेली बनी पर्ण कुटीर तैयार थी। राम लाल...
स्वामी अनेकानंद भाग 70

स्वामी अनेकानंद भाग 68

“मैं और नहीं चल सकती धीरज।” नब्बो ने करुण गुहार लगाई थी। “देख। देख पैरों में कैसे मोटे-मोटे छाले पड़ गए हैं।” नब्बो की आंखें भर आई थीं। धीरज ने मुड़ कर नब्बो के पैरों का जायजा लिया था। दोनों पैर मोटे-मोटे छालों से भरे थे। उसका हिया पसीज गया था।...
स्वामी अनेकानंद भाग 70

स्वामी अनेकानंद भाग 67

बिल्लू की सगाई टूट गई थी। बिल्लू का दिल टूट गया था। वह मीना को भूल न पा रहा था। आनंद को भी अपार दुख हुआ था। वह बिल्लू से बेहद प्यार करता था। “हमें कोई जल्दी नहीं है आनंद बाबू।” मीना का बड़ा भाई भुजबल कह रहा था। “लेकिन इस साल में हमें मीना की शादी...
स्वामी अनेकानंद भाग 70

स्वामी अनेकानंद भाग 66

चुनाव के प्रचार प्रसार में एक अलग तरह की सुनामी ला दी थी स्वामी घनानंद ने। मात्र सनातन को लेकर ही स्वामी घनानंद ने कुछ ऐसा जादू मारा था कि लोग उन्हें सुनने के लिए खिचे चले आते थे। जैसे सोते भारत को स्वामी घनानंद जगा रहे थे और स्वामी विवेकानंद की तरह जन क्रांति लाने का...