by Major Krapal Verma | Jun 4, 2026 | स्वामी अनेकानंद
आज सोमवती अमावस्या थी। पंडित अवध नारायण ने आज का लग्न पुरानी पर्ण कुटीर छोड़ कर नई पर्ण कुटीर में जाने का तय किया था। सुबह से ही तैयारियां आरंभ हो गई थीं। पूरी बंबई में खबर थी कि आज के शुभ लग्न में स्वामी जी नए निवास में स्थापित होंगे। कल्लू और कदम ने बड़ी चतुराई से...
by Major Krapal Verma | May 28, 2026 | स्वामी अनेकानंद
तप:पूत काया, उजड़े बिगड़े बाल, लम्बी लटक आई दाड़ी, निस्तेज हुई आंखें और छुहारे सी सूख गई सुनहरी काया स्वामी जी की तपस्या के प्रमाण थे। घोर तप किया था – स्वामी जी ने – ये अब सर्व मान्य सच था। घोर निराशा के दलदल से बेहोश हुए अरबपति मोहन मकीन का यों साबुत बच...
by Major Krapal Verma | May 25, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“गुरु! टेलीग्राम आया है।” कदम ने राम लाल को सूचना दी थी। “बाबू कह रहा है कि आ कर ले जाएं अपना टेलीग्राम।” उसने आदेश को कह सुनाया था। राम लाल जैसे नींद से जागा हो – इस प्रकार की प्रतिक्रिया हुई थी। नई नवेली बनी पर्ण कुटीर तैयार थी। राम लाल...
by Major Krapal Verma | May 23, 2026 | स्वामी अनेकानंद
“मैं और नहीं चल सकती धीरज।” नब्बो ने करुण गुहार लगाई थी। “देख। देख पैरों में कैसे मोटे-मोटे छाले पड़ गए हैं।” नब्बो की आंखें भर आई थीं। धीरज ने मुड़ कर नब्बो के पैरों का जायजा लिया था। दोनों पैर मोटे-मोटे छालों से भरे थे। उसका हिया पसीज गया था।...
by Major Krapal Verma | May 22, 2026 | स्वामी अनेकानंद
बिल्लू की सगाई टूट गई थी। बिल्लू का दिल टूट गया था। वह मीना को भूल न पा रहा था। आनंद को भी अपार दुख हुआ था। वह बिल्लू से बेहद प्यार करता था। “हमें कोई जल्दी नहीं है आनंद बाबू।” मीना का बड़ा भाई भुजबल कह रहा था। “लेकिन इस साल में हमें मीना की शादी...