स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

सुनहरी बालों वाली को हंसते देख मेरा हंसी का सूखा स्रोत एक दम हरा हो गया है और पता नहीं कैसे अट्टहास की हंसी – जिसे मैं अब तक भूल ही गया था, मेरे अंदर से अनवरत फूट चली है। “हाहाहा! हाहाहा! जिंदगी .. ओह जिंदगी .. लव – अच्छा-अच्छा बोल तेरा नाम क्या है...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड चौदह

पूरा कलंगूट बीच देश विदेशों से आए हिप्पियों, विद्यार्थियों और भिन्न-भिन्न धर्म और समाज सुधारकों से भरा है। लगता है मेरे बीच के गुजरे समय में प्रदीप ने इस संस्था को और आगे बढ़ाया है। प्रदीप का सुघड़ चेहरा सामने उभरने लगता है। “पिटकर आए हो?” जैसे वह मुझसे...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड तेरह

“ऐ! तेरी सगाई हो गई!” मैंने ही वैशाली को अंदर जाकर सूचना सुनाई है। “चुप! यों चिल्लाओगे तो ..?” “सच! लड़का कोई डॉक्टर है। तुम दोनों की खूब पटेगी!” वैशाली को मैंने किसी अपूर्व खुशी से भरते देखा है। पल भर के लिए वो आचार्य, मढ़ी और भारत...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड बारह

अपनी पूरी सामर्थ्य लगा कर मैं मेले के प्रतिबंध में जुट गया हूँ। आचार्य की छोटी जमा पूंजी के पांच सौ रुपये मैंने वैशाली से अंट लिए हैं और आचार्य को शामियाना और कनात लाने पांच मील कस्बे तक दौड़ाया है। मैं अब पूर्णतः मेला को एक यादगार बनाने की सोच बैठा हूँ और चाहता हूँ...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड पंद्रह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड ग्यारह

“और दूसरा कदम?” “दूसरे कदम में गृहस्थ होना चाहिए लेकिन सधा हुआ, सोचा हुआ और उस गृहस्थ की उन मांगों को संवरण करने की संपूर्ण शक्ति होनी चाहिए!” “लेकिन आज तो फ्री सोसाइटी .. फ्री सेक्स और ..” “मैं जानता हूँ कि ये नई लहर...