राम चरन भाग दो

राम चरन भाग दो

“थालियां किसने धोईं?” श्यामल का सीधा प्रश्न था। चांदी की तरह चमकती थालियों को देख श्यामल का मन प्रसन्न हो उठा था। उसने निगाहें उठा कर कालू के चेहरे को पढ़ा था। एक नया गर्व बैठा था वहां। कालू के हाव भाव बदले हुए थे। वो अन्य दिनों वाला हारा थका कालू न था।...
राम चरन भाग दो

राम चरन भाग एक

कालू परेशान था। जिस आदमी को उसने ग्राहक माना था वह तो फटे हाल कोई भिखारी था। घंटों से कालू के घर के खाने की ठेली के सामने खड़ा था – अवाक। “शायद बहुत भूखा है।” कालू ने तनिक पसीजते हुए सोचा था। “पैसे नहीं होंगे।” इसलिए उसने मान लिया था कि...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड अठारह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड अठारह

“नहीं मुक्ति यों सारी प्रशंसा मुझ पर मत थोपो!” सोफी तनिक लजा गई है। “और एक नया काम भी इन्होंने किया है!” मुक्ति हर सूचना एक वफादार नौकर की तरह मुझे पकड़ा देना चाहता है। “वो क्या?” मैंने उत्सुकता से पूछा है। “स्कूल की...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड अठारह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड सत्रह

“क्या तुम्हें पता चल गया था .. कि ..?” “नहीं! मैं तो तुम्हारे पास आई थी!” “कोई नया पाठ पढ़ाने?” मैंने व्यंग किया है। मैं और सोफी तनिक सहमी सी हंसी से भर गए हैं। मेरा व्यंग उसे बुरा नहीं लगा है और यों छोड़े तीर को सोफी के प्रसारों...
स्नेह यात्रा भाग दस खंड अठारह

स्नेह यात्रा भाग दस खंड सोलह

“ऐ .. दे दे जल्दी उपदेश – विश्व कल्याण! हाहाहा माई ब्लाडी फुट!” मैं तनिक रुका हूँ। परछाई अब भी अवाक खड़ी है। मुझे उम्मीद थी कि अब वो बोलेगी पर उसकी जुबान से एक भी शब्द नहीं टूटा है। श्वास के उच्छवास में मिली आतुरता मुझे जगा नहीं पा रही है। हवा से...