by Major Krapal Verma | Oct 22, 2023 | राम चरण
“थालियां किसने धोईं?” श्यामल का सीधा प्रश्न था। चांदी की तरह चमकती थालियों को देख श्यामल का मन प्रसन्न हो उठा था। उसने निगाहें उठा कर कालू के चेहरे को पढ़ा था। एक नया गर्व बैठा था वहां। कालू के हाव भाव बदले हुए थे। वो अन्य दिनों वाला हारा थका कालू न था।...
by Major Krapal Verma | Oct 20, 2023 | राम चरण
कालू परेशान था। जिस आदमी को उसने ग्राहक माना था वह तो फटे हाल कोई भिखारी था। घंटों से कालू के घर के खाने की ठेली के सामने खड़ा था – अवाक। “शायद बहुत भूखा है।” कालू ने तनिक पसीजते हुए सोचा था। “पैसे नहीं होंगे।” इसलिए उसने मान लिया था कि...
by Major Krapal Verma | Oct 1, 2023 | स्नेह यात्रा
“नहीं मुक्ति यों सारी प्रशंसा मुझ पर मत थोपो!” सोफी तनिक लजा गई है। “और एक नया काम भी इन्होंने किया है!” मुक्ति हर सूचना एक वफादार नौकर की तरह मुझे पकड़ा देना चाहता है। “वो क्या?” मैंने उत्सुकता से पूछा है। “स्कूल की...
by Major Krapal Verma | Sep 24, 2023 | स्नेह यात्रा
“क्या तुम्हें पता चल गया था .. कि ..?” “नहीं! मैं तो तुम्हारे पास आई थी!” “कोई नया पाठ पढ़ाने?” मैंने व्यंग किया है। मैं और सोफी तनिक सहमी सी हंसी से भर गए हैं। मेरा व्यंग उसे बुरा नहीं लगा है और यों छोड़े तीर को सोफी के प्रसारों...
by Major Krapal Verma | Sep 23, 2023 | स्नेह यात्रा
“ऐ .. दे दे जल्दी उपदेश – विश्व कल्याण! हाहाहा माई ब्लाडी फुट!” मैं तनिक रुका हूँ। परछाई अब भी अवाक खड़ी है। मुझे उम्मीद थी कि अब वो बोलेगी पर उसकी जुबान से एक भी शब्द नहीं टूटा है। श्वास के उच्छवास में मिली आतुरता मुझे जगा नहीं पा रही है। हवा से...