राम चरन भाग बत्तीस

राम चरन भाग बत्तीस

“राम चरन कहां है?” आसन पर मौन बैठे पंडित कमल किशोर पर सुंदरी ने गोली की तरह प्रश्न दागा था। पंडित जी चौंक पड़े थे। सामने खड़ी सुंदरी को उन्होंने एक चुनौती की तरह देखा था। वो डर गए थे। सुंदरी के बदन से आती मोहक सुगंध ने उन्हें जगा सा दिया था। उन्हें याद हो...
राम चरन भाग बत्तीस

राम चरन भाग इकतीस

नई उमंग के साथ आज कालू घर से व्यापार के लिए निकला था। भोंदू – नया नौकर रेहड़ी खींच रहा था। पुराना नौकर राम चरन आ कर सर्विस संभालेगा वह जानता था। उसने व्यापार को आगे बढ़ाना था। कारण – अरुण वरुण का एडमीशन था। अंग्रेजी पढ़ लिख कर अरुण वरुण का कलक्टर बनना भी...
राम चरन भाग बत्तीस

राम चरन भाग तीस

तीन बसें बदली थीं। एक घंटा मंगी के घर पहुंचने के लिए पैदल चली थी। दिल्ली के गरम माहौल ने उसे खा-खा लिया था। कई बार पसीना आ कर सूख गया था। लेकिन काम ही ऐसा था कि श्यामल के पैर थमे न थे। अंग्रेजी पढ़ लिख कर दोनों बेटे अरुण वरुण अगर कलक्टर बन जाने थे तो घाटा क्या था? यही...
राम चरन भाग बत्तीस

राम चरन भाग उनतीस

“अंधे कुंए में छलांग लगाने से पहले सोच लो सुंदरी!” एक चेतावनी थी जो कार चलाते-चलाते सुंदरी के दिमाग में उठ बैठी थी। सुंदरी ने कार में जोरों से ब्रेक मारे थे। कार खड़ी कर इंजन भी बंद कर दिया था। ताजी हवा आने के लिए शीशे खोल दिए थे। चारों ओर उगे पेड़ों की...
राम चरन भाग बत्तीस

राम चरन भाग अट्ठाईस

कालू की आज छुट्टी थी। लेकिन राम चरन को मरने तक की फुरसत न थी। आज शिव चौदस थी। मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ जुटी थी। पूजा पाठ चल रहा था। शिव पर लोग दूध चढ़ा रहे थे, बेल पत्र अर्पण कर रहे थे और न जाने कौन-कौन किस-किस तरह की पूजा अर्चना में उलझा था। पंडित जी को भी...