“वो जो इस मीटिंग के सुझावों से सहमत नहीं अब हाथ खड़ा करें!” मुक्तिबोध ने दोबारा घोषणा की है। “हाथ खड़ा नहीं – मैं आवाज बुलंद करना चाहती हूँ!” आवाज के तीखेपन से और दिशा से ही मैं जान…