“तो काम कैसे चलता है?” “काम चलता है जूते से। सच मानिए जूते से पैसा डरता है। अब आप को ही ले लें – शराफत, ईमानदारी या यों लोगों के हित की सोचने से आप को क्या मिलता है?” “संतोष, मिस्टर…