बाहर पतोहरी चटकी है। उसके घिघियाते गले की चीत्कार में किसी खतरे का संदेश है। कोई अनधिकार मेरे कमरे की ओर बढ़ने की चुपचाप चेष्टा में संलग्न पतोहरी ने देख लिया है और निर्लिप्त भाव से मुझे आगाह कर देन…