एक पल मैं और शीतल एक दूसरे को आंखों में घूरते रहे हैं। शीतल के और मेरे मन में उठी कामी टीस किसी नफरत और निराशा में परिणत होती लगी है। शीतल के चेहरे पर बिखरा आह्लाद, आरक्त गालों से रिसता लावण्य और आ…