गहराता घनीभूत अंधेरा आज मुझे अभिन्न अंग लग रहा है। मैं इसी अंधेरे की सुरंग में सुरक्षित आगे लपका जा रहा हूँ। पैरों में मुझे बहुत दूर तक ले जाने की सामर्थ्य एकाएक भर गई लगी है। मन मेरे साथ है और ये…