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मैं फांसी पर झूलूँगा !!

khudiram bose

भोर का तारा – नरेन्द्र मोदी !

महान पुरुषों के पूर्वापर की चर्चा !!

मुझे चिंता है ! बेहद चिंता है !! मैं परेशान हूँ !!!

काश ! अमित अभी तक जेल में बैठा है . आज एक सप्ताह हो गया . मैं चाह कर भी उसे जेल से छुड़ा नहीं पाया हूँ . क्या सोचता होगा , अमित ….?

कल जब उस से बात हुई थी तो वह मुझे उद्विग्न नहीं लगा था . न डरा हुआ था , वह ! हँसता -खेलता सा वह ..तो वही अमित था …जो बड़ी से बड़ी समस्या को ..जोड़-तोड़ के गणित में डाल , हल कर देता है ….और ….

जरूर ही वह आज बगुले की तरह अपनी जेल की कोठरी में बैठा देश के ही हित-चिंतन में लगा होगा …? उस का और कोई शौक ही नहीं है , न ….!

पर मैं बौखलाया हुआ हूँ . उसे जेल से छुडाना अब मेरा ही जिम्मा तो है ….?

मुख्य मुद्दा है ….कि हम दोनों ने ….मिल कर …या कि साज़िश रच कर …देश=भक्त उन मुसलमानों को मरवाया …जो बिलकुल बे-गुनाह थे …’मौलाना’ थे …’संत’ थे ….! हम दोनों कट्टर सांप्रदायिक हैं ! हम दोनों किसी कल्पित हिन्दू ग्रुप के नुमाईंदे हैं ….और बहुत-बहुत ख़तरनाक हैं ! कांग्रेस को डर है कि हम दोनों …देश का मिजाज़ ही बिगाड़ देंगे ….जलजला सा कुछ ला देंगे ….नफ़रत के ऐसे बीज बो देंगे …जिस के बाद देश संभाले से न संभलेगा ….! अतः हम दोनों का एक बीमारी की तरह इलाज़ अभी हो जाना चाहिए !

ठीक अगले चुनावों से पहले-पहले …..!!

आप नहीं समझे ….? कांग्रेस को और उस की नीतियों को समझना इतना आसान नहीं है .., श्रीमान ! “डिवाईड एंड रुल ‘ कांग्रेस ने अंग्रेजों से जाते-जाते उधार ले लिया था  और जाते-जाते अंग्रेज भी हिन्दू-मुसलमान को बाँट कर …नफरत के बीज बो कर गए थे ! उन के जाने के बाद कांग्रेस ने इस ‘हिन्दू-मुसलमान’ के फ़ॉर्मूले को इस कदर पेटेंट कर लिया है कि …भीर-गाढ़ में इसे दवा-दारू की तरह इस्तेमाल कर लेते हैं !

सूचना के तौर पर ही मैं आप को अवगत करा दूं कि गुजरात एक हिन्दू बहुल राज्य है ! लेकिन यहाँ के हिन्दू और मुसलमान बड़े ही प्रेम पूर्वक साथ-साथ रहते हैं ! बड़े ही शान्ति-प्रिय लोग हैं . सब खाते -कमाते लोग हैं . संभ्रांत है ….!! 

अब आप पूछेंगे कि …फिर ये दंगे क्यों होते हैं …..?

तो इस का उत्तर मैं आप को विस्तार से देता हूँ ! हाँ,हाँ ! अब एक बार मैं भी चाहता हूँ कि …इस बीमारी का फिर से जायजा लूं …और इस का इलाज़ भी खोजूं !

सन १९६९ के हुए गुजरात के हिन्दू-मुसलमान के दंगों को कौन भुला सकता है …?

हज़ारों-हज़ार लोगों का कत्ले-आम हुआ था ! खूब जम कर मार-काट हुई थी . एक दूसरे के खून के प्यासे बने – हिन्दू-मुसलमान ….खुल कर सडकों पर आ गए थे ! सरकारी तंत्र पूरी तरह से हरकत में था …पर कुछ कर न पा रहा था ! लेकिन क्यों …? ये तो आप ही सोचें ….

कुल मिला कर घटना भी ये थी –

कालूपुर इलाके में मुसलमानों की बस्ती है . वहां सामने सड़क पर ही पुलिस स्टेशन स्थित है ! और उस के ठीक सामने ही एक मस्जिद भी स्थित है !! उस मस्जिद के आस-पास ही मुसलमानों की दो दुकाने भी स्थित हैं . जब १९६९ में दंगे भड़के थे ….तो इन दुकानों और इस मस्जिद को जला दिया था ! इस के अलावा भी जान-माल की खूब क्षति हुई थी !

अब आप जानना चाहेंगे कि उस वक्त गुजरात का मुख्य मंत्री कौन था ? तो मैं कहूँगा कि श्री हितेंद्र देसाई मुख्य मंत्री थे और कांग्रेस पार्टी के थे ! और फिर मैं ये सूचना भी दूंगा कि …केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी…..और श्रीमती इंदिरा गाँधी प्रधान मंत्री थीं . और उन की ही नाक के नीचे यह सब हुआ था ….!! 

वह स्वयं गुजरात राज्य के दौरे पर अहमदाबाद आई थीं . उन्हें सीधा ही कालूपुर ले जाया गया था . उन्हें दिखाया गया था कि किस तरह से बे-रहम हिन्दूओं ने …न केवल मुसलमानों की दुकाने ही जलाईं थीं ….बल्कि वहां स्थिति मस्जिद को भी जला कर ख़ाक कर दिया था ! अब एक वीभत्स द्रश्य इंदिरा जी के सामने खड़ा हो हंसने लगा था ! वो तिलमिला उठीं थीं ….!!

“नापो ….! नापो  ….!! इस जगा को नापो …..” अचानक ही इंदिरा गांधी आदेश दे रहीं थीं . “पुलिस स्टेशन से …मस्जिद तक के फासले को नापो …..!” उन का आदेश था .

“चालीस……… गज …….!!” उन्हीं के नुमाईन्दों ने उन्हें सूचना दी थी . 

“पुलिस स्टेशन से कुल चालीस गज पर ….मस्जिद …..और वो जल गई ….?” उन्हें भी आश्चर्य हुआ था . “कैसे ….? मैं नहीं मानती  ….. !” वो बिगड़ी थीं . “साजिश है …..चाल है …..कोई जाल है …..जरूर कोई ….” वह कहती रहीं थीं . “जांच होगी ….मुकम्मल जांच होगी ……” वह लौट गईं थीं – निराश ….आहत ….और उत्तेजित ….!!

हुई जांच के परिणाम भी मैं आप को बताता हूँ ! 

लगभग ५००० लोग इन १९६९ के दंगों में मारे गए थे . जगमोहन कमीशन ने जांच के नाम पर लीपा-पोती की थी . गुजरात के इतिहास से इन दंगा मृतकों का नाम ही हटा दिया गया था . इतने बड़े काण्ड के बाद भी …कोई चार्ज शीट दाखिल नहीं हुई थी . किसी को भी दोषी नहीं माना गया था . ‘सांप्रदायिक’ नाम दे कर इन दंगों को दफन कर दिया गया था .

मोटे तौर पर मैं आप को सूचित कर दूं कि …सन १९४७ से ले कर सन २००२ तक गुजरात राज्य में करीब ११००० सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं . अगर मैं इस राज्य का मुख्य मंत्री न होता तो …शायद ये जानकारी मेरे पास न होती ! पर मैं दावे के साथ यह सब आप को बता रहा हूँ …क्यों कि यह सब फाईलों पर दर्ज है ! 

और हाँ , एक और भी ज़रूरी जानकारी दे दूं ! एक दो को छोड़ कर …गुजरात प्रदेश में दंगों के समय कांग्रेसी सरकारें ही थीं !

सन १९८५ की ही बात करते हैं ! एक माह तक पूरा गुजरात प्रदेश सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलसता रहा था ! जम कर युद्ध हुआ था ! भारी संख्या में हिन्दू-मुसलमान मरे थे ! आरोपों और प्रत्यारोपों से अखबार भरे पड़े थे . प्रदेश की ज़मीन तक लाल हो गई थी ! लेकिन …….

प्रदेश के मुख्य मंत्री भी तब सोलंकी जी थे और कांग्रेस के ही थे ! और हाँ , केंद्र में तब श्री राजीव गाँधी प्रधान मंत्री थे ….और सरकार भी कांग्रेस की ही थी !! 

इसी तरह १९८७ में भी हिन्दू-मुसलमान के बीच भयंकर दंगे हुए थे ….और तब भी प्रदेश में मुख्य मंत्री श्री अमर सिंह चौधरी ….और ये भी कांग्रेस के ही थे ! और फिर मुख्य मंत्री चिम्मन भाई पटेल …जो कांग्रेस के ही थे …सप्ताहों तक प्रदेश को सांप्रदायिक दंगों में जलते देखते रहे थे ….और फिर १९९२ में …इन्हीं के शाशन काल में …गुजरात १५ दिनों तक ..जलाता रहा था !! 

गुजरात राज्य में सांप्रदायिक दंगे …कर्फ्यू ….आगजनी ….ये सब कोई नई बात नहीं है ! 

चलो ! अब मैं अपनी ढपली बजाना बंद करता हूँ ! अब मैं आप को एक सटीक और निष्पक्ष दस्तावेज की जानकारी देता हूँ ! 

सुन्नी वोहरा समुदाय के गुजराती मुसलमान – जफ़र सरेशवाला अपने लेख ‘व्हाई द …मुस्लिम्स …लाईक मोदी …?’ में लिखते हैं –

“कांग्रेस राज में गुजरात में हुए दंगों के वक्त …मुसलमानों को सब से अधिक जान-माल …और कारोबार …का नुक्सान उठाना पड़ा …और उन की एफ़ आई आर तक नहीं लिखी जाती थी ! ये दंगे हमारी राजनीति की देन हैं -गुजराती हिन्दू-मुसलमान की नहीं हैं ! और अगर मोदी सांप्रदायिक होता तो मुसलमान गुजरात में रह ही नहीं सकते थे …? आज अगर गुजरात में मुसलमान सुरक्षित हैं तो …केवल इस लिए कि यहाँ का हिन्दू सांप्रदायिक नहीं है ! देश के राजनीतिज्ञ सांप्रदायिक हैं !!”

अब शायद आप की समझ में आ जाए कि यहाँ का हिन्दू-मुसलमान न तो लड़ना चाहता है …और न ही एक दूसरे के खून का प्यासा है . 

जफ़र और आगे लिखते हैं – 

“गुजरात प्रान्त में तकरीबन ११००० सांप्रदायिक दंगे हुए …लेकिन इस देश की जनता में से …कोई क्या बता सकता है कि ..नरेन्द्र मोदी को छोड़ कर , किसी एक भी मुख्य मंत्री ने जनता के बीच जा कर सद्भावना यात्रा की हो …? और मैं दावे के साथ लिखता हूँ कि …२००२ के दंगों के बाद …गुजराती मुसलमानों के लिए यह एक पहला दशक होता है …जब उन्हें एक भी सांप्रदायिक दंगे का सामना नहीं करना पडा है !”

अब मैं भी आप को अपनी राय दे दूं ! 

गुजरात हिन्दू बहुल प्रदेश है ! लेकिन किसी हिन्दू के दिमाग में ये कभी नहीं आया कि …वहां रह रहा मुसलमान कोई गैर है ….बाहर का है …या वह इस प्रदेश का दुश्मन है ! मैंने तो देखा है कि घोर दंगों के दौरान भी …लाठी ताने खड़ा बेचारा हिन्दू ….दस बार सोचता है कि …सामने खड़े दंगाई मुसलमान का सर फोड़े …या कि उसे जाने दे ….?

अब देखिए कि  मेरे गले में भी तो ‘एंटी मुसलमान ‘ का पट्टा कांग्रेसियों ने बड़ी ही सफाई से बाँध दिया है ! अमित धाह के खिलाफ तो एफ़ आई आर भी दर्ज हो चुकी है ….और वह भी जेल में जा बैठा है ! कांग्रेस अपनी एडी-चोटी तक का जोर लगा रही है .  उन्हें पक्का विश्वास है कि …हम दोनों को इस हिन्दू-मुसलमान के दलदल में …धंसा कर कांग्रेस साफ़ जाएगी ! सत्ता ले लेगी . जहाँ उन की पहुँच है ….वहां हमारी नहीं है ! केंद्र में वो हैं …अतः पूरा तंत्र उन के साथ है !! 

सूत्रधार कौन है ….? कौन जानता है ….??

हाँ, कांग्रेस को डर है ….उन्हें डर है ….कि कहीं मैं ….’मोदी’ …या कहूं कि ‘नरेन्द्र मोदी’ उन का बना-बनाया खेल न बिगाड़ दूं ….?

अगर किसी भी तरह …मैं …केंद्र में आ गया ….तो …..???

“कांग्रेस एक ‘शब्द’ नहीं ….एक संस्था है…एक पार्टी है ! और इस पार्टी का एक इतिहास है …ऐसा इतिहास जिसे अगर स्वर्ण अक्षरों में भी लिखा जाए तो भी हम इस का ऋण नहीं उतार सकते !” मेरे दादा जी पाल पुरोहित मुझे बता रहे थे . 

मैं भी अब कांग्रेस संस्था के शारीर को अपनी जिज्ञासू उंगलिओं से सहला रहा था ! मैं बरांडे में पड़ी उसी झिलंगी चारपाई पर चित पड़ा था . दादा जी आधी टूटी टांगो वाली कुर्सी में धंसे बैठे थे . उन का चेहरा एक पुनीत-से लावण्य में डूबा था ! उन की आँखों में कोई चिंता नहीं एक अजब-सी चमक थी ! 

“यों तो कांग्रेस …एक विचार के आने से …१८८५ में पैदा हुई ! डाक्टर ह्यूम ने दादा भाई नौरोजी के साथ मिल कर …अंग्रेजी पढ़े-लिखे नौजवानों के लिए …चंद सुविधाएं सरकार से मांगने के लिए …इस का निर्माण किया था ! लेकिन उन्हें ….कांग्रेस के जनक तक को क्या पता था कि ….यही कांग्रेस एक दिन …अंग्रेजी राज के लिए बवाल बन जाएगी ….?” वह हंस रहे थे .

मैं अब उन का मंतव्य समझ गया था . कल ही तो मैं अलीपुर जा कर …पूरी ताक-झांक कर के …सारे सबूत समेट लाया था ! मैंने अरविंदो की जेल कोठरी भी देखी थी . मैंने देखा था …जहाँ उन सारे कैदियों को रखा गया था …मैंने देखा था – अलीपुर का वो सेशन कोर्ट ….जहाँ इन देश-भक्तों पर मुकद्दमा चला था ! और मैंने देखा था ….सुना था ……

“अरविंदो के भीतर ….स्वामी विवेकानंद की आत्मा प्रवेश पा गई थी ! दोनों चौदह दिनों तक साथ-साथ रहे थे ….न …?”

‘क्या सच में दादा जी …..?”

” सब सच है , नरेन्द्र ! कारण कि स्वामी जी अकाल म्रत्यु मरे थे ! उन की आत्मा अपनी उम्मीद से मिल कब पाई थी ? वह भी तो भारत को गुलाम नहीं देखना चाहते थे !” दादा जी ने मुझे सब सच-सच बता दिया था . 

“कहते हैं कि …मुकद्दमों के दौरान …बहुर सारे क़त्ल हुए थे ….?” 

“हुए थे …! जो लोग ..अंग्रेजों के इशारों पर झूठी गवाहियाँ दे रहे थे ….और वो वकील जो झूठे मुकद्दमे लड़ रहे थे …और जो सरकारी अधिकारी अंग्रेजों के साथ थे ….और जो झूठे सबूत जुटा रहे थे …उन की सरे-शाम हत्याएं हो रही थीं !”

मेरी आँखों के सामने फिर से अलीपुर जेल ….और सेशन कोर्ट उठ खड़े हुए थे ! मैं फिर से मानिकतल्ला स्थित अरविंदो के घर को देख रहा था ! मैं फिर से कोर्ट रूम से आती वकीलों की जिरह करती धारदार आवाजें सुन रहा था ! 

“ये हत्यारा है , माई लार्ड !” वकील नौर्टन जोश के साथ कह रहा था . “इस ने बम मार कर …दो बेगुनाह महिलाओं की जान ली ! इसे सजाए मौत दें ….इसे …..”

“सजाए मौत ही दें ….!!” खुदी राम बोस की आवाज़ आई थी . “मुझे सजाए मौत ही दें ….मैं सजाए मौत ही मांगता हूँ !!” एक अलौकिक आवाज़ मैं बोल रहा था , वह .” मैं फांसी पर झूलूँगा ….! वन्दे मातरम ….!!” 

फिर न जाने वो कैसा ‘वन्दे मातरम!’ का शोर था जो अतलांत को डुबोने लगा था !! 

……….

श्रेष्ठ साहित्य के लिए – मेजर कृपाल वर्मा साहित्य !!