by Major Krapal Verma | Jun 6, 2024 | राम चरण
“मैं तो बचपन में ही बर्बाद हो गई थी सर!” शगुफ्ता ने आज पहली बार अपने जीवन के रहस्यों से पर्दा उठाया था। “मेरे कजिन भाई जान ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया था। तब मैं तेरह साल की थी। उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था। उसके मैंने हाथ जोड़े थे। मैं रोई...
by Major Krapal Verma | May 31, 2024 | राम चरण
मुनीर खान जलाल की किस्मत के पाँसे अब सीधे पड़ रहे थे। कभी असंभव लगने वाला सब कुछ अब संभव होता चला जा रहा था। कुमारी टापू पर आ कर उसका मन प्रसन्न हो उठा था। एक छोटा स्वर्ग सा बसा था वहां। चारों ओर समुद्र से घिरे कुमारी टापू की साफ सुथरी बीच और टापू पर उगा लता गाछ...
by Major Krapal Verma | May 29, 2024 | राम चरण
आज पहला नवंबर था। मुनीर खान जलाल को याद था कि आज बलूच ने टेकओवर करना था। पाकिस्तान में घी के चिराग जलेंगे या कि बुझेंगे, वह अनुमान नहीं लगा पा रहा था। उसे इतना अवश्य याद था कि उन दोनों के बीच अब सलमा और सोलंकी की लाशें धरी थीं। अगर वह पाकिस्तान लौटा तो बलूच ने उसे हर...
by Major Krapal Verma | May 27, 2024 | राम चरण
ये अल्लाह की अलामत ही थी कि मुनीर खान जलाल जहन्नुम में से भाग जन्नत में पहुँच गया था। वह बहुमंजिला इमारत पर बैठा एक खुशगवार नजारे को देख रहा था। और खुश-खुश हो रहा था। कहीं दूर गगन के उस छोर पर नीला समुद्र उससे गले मिल रहा था। कुछ किश्तियां थीं और कुछ बड़े-छोटे पानी के...
by Major Krapal Verma | May 27, 2024 | राम चरण
जिंदगी में आज पहली बार था जब बलूच पूरी रात सो न पाया था। ब्रिगेडियर मुस्तफा को गहरी नींद में सोते देखता ही रहा था – बलूच। लेकिन क्या मजाल जो पलकें बंद हों तो वह भी सो कर देखे। लेकिन ये रात उसके लिए रात नहीं थी – एक अहसासों की बाढ़ थी जो उसे बहाए-बहाए बहाती...