स्वामी अनेकानंद भाग 41

स्वामी अनेकानंद भाग 41

प्रतिष्ठा ने पहली बार अपनी मां सीता देवी को यों बिफर कर रोते सुना था। खून सूख गया था प्रतिष्ठा का। ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी थी और कौन कारण हो सकता था कि मां यों हिलकियां ले-ले कर रो पड़ी थीं। ऐसा क्या था कि बाबू जी का आभा मंडल उन्हें बचा न पा रहा था। वो कौन था जो...
स्वामी अनेकानंद भाग 41

स्वामी अनेकानंद भाग 40

“क्यों न हम भी एक वूमन सैल खोल दें बबलू भैया?” धूमिल दूर की कौड़ी लाया था। “मैंने भी महसूस किया है कि क्यों न हम भी नारी शक्ति का पॉलिटिक्स में प्रयोग करें?” उसका प्रश्न था। बबलू धूमिल को बड़ी देर तक देखता रहा था। जो धूमिल कह रहा था उसमें बबलू...
स्वामी अनेकानंद भाग 41

स्वामी अनेकानंद भाग 39

हिरन गोठी की बारह एकड़ जमीन का पट्टा जन कल्याण आश्रम के नाम लिख गया था। जमीन के बीचों बीच खडे होकर राम लाल ने उसके विस्तार को बड़े चाव से आंखों में समेट लिया था। जीवन का यह पहला पल था जब वह जमीन से जुड़ा था। किस तरह उसने अपनी पहली कमाई बर्फी के नाम लिख दी थी –...