स्वामी अनेकानंद भाग 44

स्वामी अनेकानंद भाग 44

“आर यू द स्वामी?” पर्ण कुटीर में घुसते ही विभूति मकीन ने जब आनंद को देखा था तो चौंक पड़ी थी। विभूति मकीन बीमार मोहन मकीन की इकलौती बेटी थी। विभूति मकीन स्वामी अनेकानंद का नाम सुन कर अमेरिका से भारत आई थी। उसे कहा गया था कि अब मोहन मकीन किसी चमत्कार के तहत...
स्वामी अनेकानंद भाग 44

स्वामी अनेकानंद भाग 43

हिरन गोठी के जन कल्याण आश्रम में जन्माष्टमी का उत्सव जोर शोर से मनाया जाने वाला था। एक सप्ताह का प्रोग्राम था। स्वामी अनेकानंद इस महान उत्सव के अवसर पर होटल माधव मानस इंटरनेशनल से उठ कर आश्रम में बने अपने पर्ण कुटीर में पधारेंगे की घोषणा भी हो चुकी थी। उनका प्रोग्राम...
स्वामी अनेकानंद भाग 44

स्वामी अनेकानंद भाग 42

सतत प्रयत्न करने के बाद भी मानस प्रतिष्ठा की बंबई लौटने की जिद को तोड़ नहीं पाया था। राधू रंगीला निठल्ला बैठा गूलर खा रहा था तो पूरा हुस्न परी फिल्म का क्रू मातम मना रहा था। चलता काम रुक गया था। राधू की रिद्म टूट रही थी। वह बेकल हुआ बैठा था। “अगर तुम बंबई चली...