प्रभु जी मेरे अवगुण चित्त न धरो – गुलाबी मंद-मंद स्वर में स्वयं के लिए गा रही थी। वह आनंद विभोर थी। शनिवार की कीर्तन सभा में अंजली द्वारा गाया भजन और अविकार का दिया साथ उसे बेहद रुचिकर लगा था।…