अमरीश जी और उनके परिवार के जाने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ था। “ये कौन सा अनिष्ट घुस आया था आश्रम में?” स्वामी पीतांबर दास समझ ही न पा रहे थे। अनायास ही उन्हें याद हो आया था – पि…