तारों की छांव तले, खुले आसमान के नीचे, चंद्रप्रभा के किनारे बनी कुटिया में आज पीतू और गुलनार फिर से मिल रहे थे। दोनों के मनों में भूडोल भरा था। दोनों अतिरिक्त रूप से सजग थे। दोनों के बीच बह…